जरुरी जानकारी | डीएचएफएल मामला: एनएफआरए ने दो ऑडिटरों पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया

नयी दिल्ली, सात दिसंबर ‘अकाउंटिंग’ और ‘ऑडिट’ नीतियों की सिफारिश और मानकों पर नजर रखने वाले राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लि. (डीएचएफएल) के खातों के 2017-18 में ऑडिट के मामले में पेशेवर गड़बड़ी को लेकर दो ऑडिटरों पर 10 साल तक के लिए पाबंदी लगा दी है। साथ ही इनपर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

डीएचएफएल (अब पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) एक सूचीबद्ध इकाई है, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण पीरामल ग्रुप के पास है।

एनएफआरए ने बुधवार को पारित दो अलग-अलग आदेशों में जिग्नेश मेहता और अमित विनय चतुर्वेदी पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। मेहता वित्त वर्ष 2017-18 के लिए ‘अंगेजमेंट पार्टनर’ थे, जबकि चतुर्वेदी डीएचएफएल के ऑडिट के लिए ‘क्वालिटी कंट्रोल रिव्यू’ (ईक्यूसीआर) से जुड़े थे। दोनों चतुवेर्दी एंड शाह एलएलपी (सीएंडएस) के भागीदार थे।

इसके अलावा, मेहता को 10 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया जबकि चतुर्वेदी को किसी भी कंपनी या निकाय कॉरपोरेट कार्यों और गतिविधियों के वित्तीय विवरणों या आंतरिक ऑडिट के संबंध में कोई भी ऑडिट करने से पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि डीएचएफएल के निदेशकों द्वारा लगभग 31,000 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी का मामला कुछ मीडिया रिपोर्ट में जनवरी 2019 में सामने आया। इसके बाद एनएफआरए ने सीएंडएस के वित्त वर्ष 2017-18 के लिए डीएचएफएल के वैधानिक ऑडिट की समीक्षा शुरू की।

एनएफआरए ने जिग्नेश मेहता के मामले में पाया कि ऑडिटर शाखाओं के ऑडिट को लेकर अपने वैधानिक कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहा। जबकि डीएचएफएल के 2017-18 के वित्तीय विवरण के ऑडिट को पूरा करने के लिहाज से जरूरी था।

शाखाओं के ऑडिट के अभाव में, 2017-18 के वित्तीय विवरणों पर स्वतंत्र ऑडिटर की राय अधूरी और अमान्य है।

एनएफआरए चतुर्वेदी के मामले में ने पाया कि ‘अंगेंजमेंट’ गुणवत्ता नियंत्रण समीक्षा की जिम्मेदारी संभालने के बाद भी वह जिग्नेश मेहता से उस समय सवाल करने में विफल रहे, जब वह (मेहता) ऑडिटिंग के मानकों की प्रासंगिक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहे। इससे मानदंडों का उल्लंघन हुआ।

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