देश की खबरें | धवलीकर मंत्री बने, एमजीपी का भाजपा के साथ उतार-चढ़ाव भरा संबंध बरकरार

पणजी, 10 अप्रैल महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी (एमजीपी) और गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच उतार-चढ़ाव भरे संबंध में उस समय एक नया अध्याय जुड़ गया, जब विधायक सुदीन धवलीकर ने शनिवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के कैबिनेट में मंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की।

राज्य में 14 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में धवलीकर ने दावा किया था कि उनका दल सरकार बनाने में भूमिका निभाएगा और उन्होंने कहा था कि वह मुख्यमंत्री के रूप में सावंत के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन नहीं देंगे। चुनाव परिणाम की घोषणा 10 मार्च को की गई थी।

वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने मिलकर लड़ा था और भाजपा ने 40 सदस्यीय सदन में 21 सीट पर जीत हासिल की थी और एमजीपी को दो सीट मिली थीं। इसके बाद मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में बनी सरकार में सुदीन और उनके छोटे भाई दीपक को मंत्री बनाया गया था।

पर्रिकर को केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में रक्षा मंत्री बनाए जाने के बाद लक्ष्मीकांत पारसेकर मुख्यमंत्री बने और इस कदम के कारण एमजीपी और भाजपा के बीच टकराव पैदा हो गया। पारसेकर ने धवलीकर भाइयों को जल्द ही कैबिनेट से बाहर कर दिया। एमजीपी ने 2017 में शिवसेना और कुछ अन्य गैर-भाजपाई संगठनों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। उसने तीन सीट जीतीं और पर्रिकर को फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात स्पष्ट हो जाने पर उसने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी।

इसके बाद, पर्रिकर के 2019 में निधन के बाद दोनों दलों के बीच संबंध फिर से खराब हो गए और शिरोडी उपचुनाव में एमजीपी द्वारा भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सावंत ने धवलीकर को हटा दिया।

इसके कुछ ही देर बाद धवलीकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में फिर से भाजपा का कभी समर्थन नहीं करने का संकल्प लिया और कहा कि ऐसा करना उनके और ‘एमजीपी’ के लिए ‘‘राजनीतिक आत्महत्या करने के समान होगा।’’

एमजीपी ने तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन में 2022 का चुनाव लड़ा। तृणमूल अपना खाता खोलने में विफल रही तथा एमजीपी ने मडकाई (सुदीन धवलीकर) और मंड्रेम (जित अरोलकर) सीट जीतीं।

भाजपा को सदन में 20 सीट मिलीं, जो बहुमत से मात्र एक कम थी। इसी बीच एमजीपी ने उसे बिना शर्त सहयोग देने की घोषणा की और धवलीकर को शनिवार को सावंत के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाया गया।

मंत्री बनने के बाद धवलीकर ने कहा कि दोनों दलों के बीच गठबंधन 10 साल के लिए है।

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