जरुरी जानकारी | विदेशों में गिरावट के बावजूद मांग निकलने से मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन मे सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट रहने के बावजूद मंडियों में कमजोर आवक तथा थोक दाम सस्ता होने की वजह से मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। विदेशों में गिरावट तथा डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने के बीच सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम अपरिवर्तित रहे। मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट है।
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल विदेशी बाजारों में गिरावट रहने के बावजूद मंडियों में कमजोर आवक तथा थोक दाम सस्ता होने की वजह से मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। विदेशों में गिरावट तथा डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने के बीच सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम अपरिवर्तित रहे। मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि वैश्विक व्यापार में ‘टैरिफ युद्ध’ के कारण खाद्यतेल बाजार में हड़कंप है, लेकिन देशी तेल-तिलहन पर ज्यादा असर देखने को फिलहाल नहीं मिल रहा। सरसों, मूंगफली, बिनौला का कोई विकल्प नहीं है। मूंगफली पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे दाम पर बिक रहा है। सहकारी संस्था नेफेड की सोयाबीन बिक्री रोकने के बाद किसान अपनी मर्जी से सोयाबीन बेच रहे हैं और बाजार में उनकी ओर से आवक कम बनी हुई है। बिनौले की उपलब्धता कम है।
उन्होंने कहा कि थोक दाम सस्ता होने और मांग निकलने से मूंगफली तेल-तिलहन में कल के मुकाबले तो सुधार आया लेकिन दाम अब भी एमएसपी से काफी नीचे है। महाराष्ट्र में सोयाबीन डीओसी की मांग बढ़ने से सोयाबीन तिलहन के दाम में भी सुधार देखने को मिला। सोयाबीन का दाम भी एमएसपी से नीचे बना हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि वैसे तो स्टॉकिस्टों की ओर से सरसों की लिवाली जारी है। विदेशों में बाजार टूटने और रुपया के कमजोर रहने के बीच सरसों तेल-तिलहन, शिकागो में गिरावट के बीच सोयाबीन तेल, मलेशिया में गिरावट के बावजूद दाम ऊंचा बने रहने के कारण मांग प्रभावित रहने से पाम-पामोलीन तथा आम गिरावट के दवाब के बीच स्टॉक की कमी के साथ मांग बने रहने के बीच बिनौला तेल के दाम स्थिर बने रहे।
सूत्रों ने कहा कि देश का तेल-तिलहन उत्पादन तभी बढ़ेगा जब किसानों को उनकी तिलहन ऊपज के अच्छे दाम मिलेंगे। इसके लिए घरेलू बाजार को विकसित करना जरूरी है। इसके लिहाज से ही शुल्कों का निर्धारण तथा बाकी अन्य नीतियां बनाने की आवश्यकता है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,300-6,400 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 5,700-6,075 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,150 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,230-2,530 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,370-2,470 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,370-2,495 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 12,600 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 13,050 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,425-4,475 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,125-4,175 रुपये प्रति क्विंटल।
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