रांची, 19 अगस्त झारखंड उच्च न्यायालय ने जेल में बंद सिदो-कान्हो विश्वविद्यालय डिप्टी रजिस्ट्रार शंभु प्रसाद सिंह को जेपीएससी घोटाला मामले में बुधवार को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय की पीठ ने विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार रहे शंभू प्रसाद सिंह को दस-दस हजार रुपये के दो निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
इससे पूर्व सीबीआई अदालत से जमानत खारिज होने के बाद शंभु प्रसाद ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। दूसरी ओर निचली अदालत में जमानत खारिज होने के बाद सीबीआई ने 13 जून 2020 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान शंभु प्रसाद सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता ए के कश्यप एवं अनुराग कश्यप ने न्यायालय को बताया कि जेपीएससी ने उनके मुवक्किल को सिदो-कान्हो विश्वविद्यालय, दुमका का डिप्टी रजिस्ट्रार बनाने की अनुशंसा भेजी थी। विवाद के बाद चांसलर की ओर से पूरे मामले की जांच की गई और उसके बाद इन्हें उक्त पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया था। वर्ष 2008 में इन्होंने चांसलर के आदेश के बाद कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद वर्ष
2012 में सीबीआइ ने जेपीएससी मामले की जांच शुरू की।
जांच के बाद सीबीआइ कोर्ट में इनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गयी। इसमें आरोप लगाया गया कि इनके भाई गोपाल प्रसाद सिंह जेपीएससी के सदस्य थे और इसकी वजह से इन्हें दो अंक ज्यादा दिया गया था।
शंभु के वकीलों ने पीठ को बताया कि उनकी योग्यता और व्याख्याता कार्य के अनुभव
देखते हुए ही चांसलर ने उन्हें नियुक्त करने का आदेश दिया था। ऐसे में इनपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
बहस सुनने के बाद न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दिया।
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