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विदेश की खबरें | अवसाद शायद मस्तिष्क में एक रासायनिक असंतुलन के कारण नहीं होता है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लंदन, 21 जुलाई (द कन्वरसेशन) पिछले तीन दशकों से, लोगों को इस जानकारी से भर दिया गया है जो यह सुझाव देती है कि अवसाद मस्तिष्क में एक रसायन, जिसे सेरोटोनिन कहा जाता है, के असंतुलन के कारण होता है। हालांकि, हमारी नवीनतम शोध समीक्षा से पता चलता है कि सबूत इस बात का समर्थन नहीं करते हैं।

विदेश की खबरें | अवसाद शायद मस्तिष्क में एक रासायनिक असंतुलन के कारण नहीं होता है

लंदन, 21 जुलाई (द कन्वरसेशन) पिछले तीन दशकों से, लोगों को इस जानकारी से भर दिया गया है जो यह सुझाव देती है कि अवसाद मस्तिष्क में एक रसायन, जिसे सेरोटोनिन कहा जाता है, के असंतुलन के कारण होता है। हालांकि, हमारी नवीनतम शोध समीक्षा से पता चलता है कि सबूत इस बात का समर्थन नहीं करते हैं।

हालांकि पहली बार 1960 के दशक में इस तरह की बात सामने आई थी, अवसाद के सेरोटोनिन के असंतुलन से जुड़े होने के सिद्धांत को 1990 के दशक में दवा उद्योग द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित किया जाने लगा, जो कि एंटीडिप्रेसेंट्स की एक नई श्रृंखला का विपणन करने जा रहा था, जिसे सेरोटोनिन-रीपटेक इनहिबिटर या एसएसआरआई के रूप में जाना जाता है।

इस विचार को अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन जैसे आधिकारिक संस्थानों द्वारा भी समर्थन दिया गया था, जो अभी भी जनता को यही बताता है कि ‘‘मस्तिष्क में कुछ रसायनों में असमानता अवसाद के लक्षणों में योगदान कर सकता है’’।

अनगिनत डॉक्टरों ने पूरी दुनिया में, अपनी निजी सर्जरी में और मीडिया में इस संदेश को दोहराया है। लोगों ने उनकी बात मान ली। और कई ने एंटीडिप्रेसेंट लेना शुरू कर दिया क्योंकि उनका मानना ​​​​था कि उनके दिमाग में कुछ गड़बड़ है जिसे सही करने के लिए एक एंटीडिप्रेसेंट की आवश्यकता होती है।

इस मार्केटिंग पहल की अवधि में, एंटीडिप्रेसेंट का उपयोग नाटकीय रूप से बढ़ गया, और अब उदाहरण के लिए इंग्लैंड में यह आलम है कि हर छह वयस्क आबादी में से एक इसका सेवन करता है।

लंबे समय से, कुछ प्रमुख मनोचिकित्सकों सहित कुछ शिक्षाविदों ने सुझाव दिया है कि इस विचार का समर्थन करने के लिए कोई संतोषजनक सबूत नहीं है कि अवसाद असामान्य रूप से कम या निष्क्रिय सेरोटोनिन का परिणाम है।

अन्य ने इस सिद्धांत का समर्थन करना जारी रखा। अब तक, हालांकि, सेरोटोनिन और अवसाद पर शोध की कोई व्यापक समीक्षा नहीं हुई है जो किसी भी तरह से दृढ़ निष्कर्ष को मजबूत कर सके।

पहली नज़र में, यह तथ्य कि एसएसआरआई-प्रकार के एंटीडिप्रेसेंट सेरोटोनिन प्रणाली पर कार्य करते हैं, अवसाद के सेरोटोनिन सिद्धांत का समर्थन करते प्रतीत होते हैं। एसएसआरआई अस्थायी रूप से मस्तिष्क में सेरोटोनिन की उपलब्धता को बढ़ाते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि ऐसा न होना अवसाद का कारण होता है।

एंटीडिप्रेसेंट्स के प्रभावों के लिए अन्य स्पष्टीकरण हैं। वास्तव में, ड्रग परीक्षणों से पता चलता है कि जब अवसाद के इलाज की बात आती है तो एंटीडिप्रेसेंट को एक प्लेसबो (डमी गोली) से मुश्किल से अलग किया जा सकता है। इसके अलावा, एंटीडिप्रेसेंट्स में भावनाओं को शांत कर देने का एक सामान्य प्रभाव होता है जो लोगों के मूड को प्रभावित कर सकता है, हालांकि हम नहीं जानते कि यह प्रभाव कैसे उत्पन्न होता है

हालांकि एक प्रसिद्ध प्रारंभिक अध्ययन में सेरोटोनिन ट्रांसपोर्टर जीन और तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं के बीच एक संबंध पाया गया, बड़े, अधिक व्यापक अध्ययन से पता चलता है कि ऐसा कोई संबंध मौजूद नहीं है। हालांकि, अपने आप में तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं ने लोगों में अवसाद के जोखिम पर एक मजबूत प्रभाव डाला।

हमारे अवलोकन में कुछ अध्ययनों में ऐसे लोग शामिल थे जो पहले एंटीडिप्रेसेंट्स ले रहे थे या ले चुके थे, इस बात के प्रमाण मिले कि एंटीडिप्रेसेंट वास्तव में सेरोटोनिन की एकाग्रता या गतिविधि को कम कर सकते हैं।

साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं

अवसाद का सेरोटोनिन सिद्धांत अवसाद की उत्पत्ति के सबसे प्रभावशाली और व्यापक रूप से शोधित जैविक सिद्धांतों में से एक रहा है। हमारे अध्ययन से पता चलता है कि यह दृष्टिकोण वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा समर्थित नहीं है। यह एंटीडिप्रेसेंट्स के उपयोग के आधार पर भी सवाल उठाता है।

अब उपयोग में आने वाले अधिकांश एंटीडिप्रेसेंट को सेरोटोनिन पर उनके प्रभाव के माध्यम से कार्य करने के लिए जाना जाता है। कुछ मस्तिष्क रसायन नॉरएड्रेनालाईन को भी प्रभावित करते हैं। लेकिन विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि अवसाद में नॉरएड्रेनालाईन के शामिल होने के प्रमाण सेरोटोनिन की तुलना में कमजोर हैं।

एंटीडिप्रेसेंट्स अवसाद को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इसके लिए कोई अन्य स्वीकृत औषधीय तंत्र नहीं है। यदि एंटीडिप्रेसेंट भावनाओं को सुन्न करके अपना प्रभाव डालते हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि वे नुकसान ज्यादा करते हैं या फायदा।

हालांकि अवसाद को एक जैविक विकार के रूप में देखने से ऐसा लग सकता है कि यह लोगों के भीतर इसे लेकर मौजूदा नकारात्मक भावनाओं को कम करेगा, वास्तव में, शोध ने इसके विपरीत दिखाया है, और यह भी कि जो लोग मानते हैं कि उनका अवसाद एक रासायनिक असंतुलन के कारण है, वे अपने बारे में अधिक निराशावादी हैं।

ठीक होने की संभावना।

यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को पता चले कि ‘‘रासायनिक असंतुलन’’ से अवसाद होने का सुझाव काल्पनिक है। और हम यह नहीं समझते हैं कि एंटीडिप्रेसेंट्स द्वारा उत्पादित अस्थायी रूप से बढ़ते सेरोटोनिन या अन्य जैव रासायनिक परिवर्तन मस्तिष्क के साथ क्या करते हैं। हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि यह कहना असंभव है कि एसएसआरआई एंटीडिप्रेसेंट लेना सार्थक है, या पूरी तरह से सुरक्षित भी है।

यदि आप एंटीडिप्रेसेंट ले रहे हैं, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप पहले अपने डॉक्टर से बात किए बिना ऐसा करना बंद न करें। लेकिन इन दवाओं को लेने या न लेने के बारे में सही निर्णय लेने के लिए लोगों के पास इनके बारे में तमाम जानकारी होनी चाहिए।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 21, 2022 01:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).