कोविड-19 के दौरान गैरपंजीकृत श्रमिक लाभ से वंचित : केंद्र, आप सरकार से जवाब तलब

याचिका में कहा गया है कि महानगर में दस लाख से अधिक मजदूरों में से केवल छोटा समूह उनके कल्याण एवं सेवाओं के नियमन के कानून के तहत पंजीकृत है और बड़ी संख्या में मजदूरों को लाभ नहीं मिल रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए।

जमात

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार से जवाब मांगा है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में निर्माण कार्य में लगे सभी मजदूरों के पंजीकरण की मांग की गई है ताकि कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को मुहैया कराए जा रहे सभी लाभ उन्हें मिल सकें।

याचिका में कहा गया है कि महानगर में दस लाख से अधिक मजदूरों में से केवल छोटा समूह उनके कल्याण एवं सेवाओं के नियमन के कानून के तहत पंजीकृत है और बड़ी संख्या में मजदूरों को लाभ नहीं मिल रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की याचिका पर केंद्रीय श्रम मंत्रालय और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और आठ मई को सुनवाई की अगली तारीख से पहले उनसे जवाब मांगा।

अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को भी नोटिस जारी किया।

दिल्ली सरकार की तरफ से अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल संजय जैन, वकील संजय घोष और वकील उर्वी मोहन ने अंतरिम आदेश जारी करने का विरोध किया और अदालत को आश्वस्त किया कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।

अलेदिया की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील सुधीर नंदराजोग और वकील शिवेन वर्मा ने कहा कि केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को परामर्श जारी कर भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कानून के तहत पंजीकृत कामगारों को भुगतान करने में भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के कोष का इस्तेमाल करने के लिए कहा है।

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