नयी दिल्ली, चार सितंबर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ‘प्रौद्योगिकी एवं शिक्षकों’ को एक साथ लाने की जरूरत को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि भारत के लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और विविधता को तकनीकी बदलाव के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी पूरे समाज के लिए समतुल्य बन जाए।
प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और मेटा के बीच 3 साल की साझेदारी "शिक्षा से उद्यमिता: छात्रों, शिक्षकों और उद्यमियों की एक पीढ़ी का सशक्तिकरण" की शुरुआत की।
मेटा के तहत ही फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंच संचालित होते हैं और यह (मेटा) इनका मूल संगठन है।
शिक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, मेटा और राष्ट्रीय उद्यमिता लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) के बीच 3 आशय पत्रों (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया।
इस अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज शुरू की गई पहल भारत को दुनिया की कौशल राजधानी बनाने और हमारी अमृत पीढ़ी को सशक्त बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘ शिक्षा से उद्यमिता’ साझेदारी एक गेम-चेंजर (स्थिति बदलने वाली) है, जो डिजिटल कौशल निर्माण को जमीनी स्तर तक ले जाएगी।’’
शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह हमारी प्रतिभाओं की क्षमताओं का निर्माण करेगा, छात्रों, युवाओं, कार्यबल और सूक्ष्म-उद्यमियों को भविष्य की प्रौद्योगिकियों के साथ सहजता से जोड़ेगा और अमृत पीढ़ी को नए युग के समस्या समाधानकर्ताओं और उद्यमियों में बदल देगा।
उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और विविधता को प्रौद्योगिकी रूपांतरण से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी पूरे समाज के लिए समतुल्य बन जाए।
प्रधान ने कहा कि यह साझेदारी देश की आबादी को महत्वपूर्ण डिजिटल कौशल से सुसज्जित करने और सूक्ष्म उद्यमियों और छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाने के लिए अनंत संभावनाओं को उत्प्रेरित करेगी।
वहीं, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि सरकार तेजी से बदलते समय में युवाओं और कार्यबल को सफल बनाने और प्रौद्योगिकी एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था के उभरते परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कौशल से सुसज्जित करने की दिशा में काम कर रही है।
दूसरी ओर, एक वीडियो संदेश में मेटा के वैश्विक मामलों के अध्यक्ष सर निक क्लेग ने कहा कि भारत का प्रतिभा आधार और तेजी से डिजिटल अपनाना इसे उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश करने के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
उन्होंने कहा कि वे भारत के छात्रों, युवाओं और उद्यमियों को सशक्त बनाने में मेटा के योगदान की आशा करते हैं।
शिक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, राष्ट्रीय उद्यमशीलता और लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) के साथ साझेदारी के तहत, अगले तीन वर्षों में 5 लाख उद्यमियों को मेटा द्वारा डिजिटल विपणन कौशल तक पहुंच प्राप्त हो सकेगी।
इसमें कहा गया है कि शुरुआत में उभरते और मौजूदा उद्यमियों को 7 क्षेत्रीय ओं में मेटा के मंच का उपयोग करके डिजिटल विपणन कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगा।
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