जरुरी जानकारी | मनरेगा में रोजगार की मांग महामारी-पूर्व स्तर पर पहुंची: आर्थिक समीक्षा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम की मांग जुलाई से नवंबर 2022 के बीच महामारी-पूर्व स्तर के आसपास रही। मंगलवार को पेश आर्थिक समीक्षा में इसका श्रेय ‘ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामान्य होने’ और ‘कोविड की वजह से आई सुस्ती से तीव्र पुनरुद्धार’ को दिया गया है।

नयी दिल्ली, 31 जनवरी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम की मांग जुलाई से नवंबर 2022 के बीच महामारी-पूर्व स्तर के आसपास रही। मंगलवार को पेश आर्थिक समीक्षा में इसका श्रेय ‘ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामान्य होने’ और ‘कोविड की वजह से आई सुस्ती से तीव्र पुनरुद्धार’ को दिया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से मंगलवार को संसद में पेश की गई वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 24 जनवरी तक 6.49 करोड़ परिवारों ने मनरेगा योजना के तहत रोजगार की मांग की। उनमें से 6.48 करोड़ परिवारों को रोजगार की पेशकश की गई और 5.7 करोड़ परिवारों ने इसका लाभ उठाया।

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, ‘‘मनरेगा के तहत काम मांगने वाले व्यक्तियों की संख्या जुलाई से नवंबर 2022 के दौरान महामारी-पूर्व स्तर के आसपास देखी गई। ऐसा मजबूत कृषि विकास और कोविड की वजह से आई सुस्ती में तेज सुधार होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामान्य होने से हुआ।’’

इसके मुताबिक, मनरेगा के तहत किए गए कार्यों में पशुओं के रहने की जगह, खेत तालाब, खोदे गए कुएं, बागवानी वृक्षारोपण, वर्मीकम्पोस्टिंग गड्ढे आदि शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2019-20 में मनरेगा के तहत 265.4 करोड़ रोजगार दिवस सृजित किए गए थे। यह संख्या 2020-21 में बढ़कर 389.1 करोड़ और 2021-22 में 363.3 करोड़ हो गई। चालू वित्त वर्ष में छह जनवरी तक 225.8 करोड़ रोजगार दिवस सृजित किए गए हैं।

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