देश की खबरें | केंद्र के निर्णय के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अदालत का रुख किया: अमानतुल्लाह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 123 वक्फ संपत्तियों को केंद्र द्वारा अपने कब्जे में लेने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने सोमवार को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 20 फरवरी दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 123 वक्फ संपत्तियों को केंद्र द्वारा अपने कब्जे में लेने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने सोमवार को यह जानकारी दी।
खान ने आरोप लगाया कि इस विवाद के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।
खान ने कहा कि 123 संपत्तियां लंबे समय से वक्फ बोर्ड के पास हैं और केंद्र उस पर ‘‘जबरन कब्जा’’ करने की कोशिश में कानून और अदालतों को दरकिनार कर रहा है।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय ने दो सदस्यीय एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर हाल ही में दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया था जिसमें मस्जिदें, दरगाह और कब्रिस्तान शामिल हैं।
खान ने कहा कि समिति की रिपोर्ट को वक्फ बोर्ड के साथ साझा नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके गठन को चुनौती देने वाला मामला पहले से ही दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है।
खान ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि केंद्र इन दिनों कैसे काम कर रहा है। हम उन्हें वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा नहीं करने देंगे। हमने भूमि और विकास कार्यालय के नोटिस को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है और सुनवाई दो-तीन दिनों में होने की उम्मीद है।’’
उप भूमि और विकास अधिकारी ने आठ फरवरी को खान को भेजे एक पत्र में दिल्ली वक्फ बोर्ड को दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर 123 वक्फ संपत्तियों से संबंधित सभी मामलों से "मुक्त" करने के फैसले की जानकारी दी।
खान ने पूरे "विवाद" के लिए कांग्रेस पर आरोप लगाया। खान ने कहा, ‘‘1980 के दशक में कांग्रेस सरकार ने इन सभी 123 संपत्तियों को एक रुपये प्रति एकड़ की दर से दिल्ली वक्फ बोर्ड को पट्टे पर देने के लिए अधिसूचित किया था। इसे इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद ने अदालत में चुनौती दी थी और इस कदम पर रोक लगा दी गई थी।’’
उन्होंने कहा कि इन सभी संपत्तियों को आदर्श रूप से वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाना चाहिए था जिनमें से 90 प्रतिशत मस्जिदें हैं। उन्होंने कहा कि फिर से, 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इन 123 संपत्तियों को गैर अधिसूचित कर दिया। उन्होंने कहा कि विहिप ने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को मामले पर फैसला करने का निर्देश दिया।
उन्होंने दावा किया कि मंत्रालय ने पहले एक सदस्यीय समिति और बाद में दो सदस्यीय समिति बनाई लेकिन इन समितियों की रिपोर्ट वक्फ बोर्ड के साथ साझा नहीं की गई। खान ने आरोप लगाया, "विवाद कांग्रेस ने खड़ा किया और इसने हमें धोखा दिया है।"
उन्होंने कहा कि मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तानों सहित 123 संपत्तियों का मुस्लिम समुदाय द्वारा उपयोग किया जा रहा है और केंद्र को उन पर कब्जा करने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने दो सदस्यीय समिति के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 123 संपत्तियों के बारे में अपनी राय पेश नहीं की। खान ने कहा कि दो सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया गया था।
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