देश की खबरें | दिल्ली झुग्गी: कोरोना वायरस ने हमारा सब कुछ छीन लिया, अब सिर से छत भी छीनी जा रही: निवासी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोविड-19 महामारी के चलते 48 वर्षीय वीराम्मा के परिवार की आजीविका चली गई। उन्हें अब इस बात का डर है कि दिल्ली में रेल पटरी के किनारे से 48 हजार झुग्गियों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर वह अपने सिर से छत भी खो देंगी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 13 सितम्बर कोविड-19 महामारी के चलते 48 वर्षीय वीराम्मा के परिवार की आजीविका चली गई। उन्हें अब इस बात का डर है कि दिल्ली में रेल पटरी के किनारे से 48 हजार झुग्गियों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर वह अपने सिर से छत भी खो देंगी।

लाजपत नगर में जल विहार के नजदीक पटरी के पास स्थित अपने घर के बाहर बैठी वीरम्मा ने कहा, ‘‘मेरे पति का जन्म यहीं हुआ था। मेरे बेटे का जन्म भी यहीं हुआ था। मेरे सास-ससुर ने यहीं पर अंतिम सांस ली। हमारे पास सबकुछ यही है।’’

यह भी पढ़े | Delhi Riots Police Chargesheet: दिल्ली हिंसा मामले में सीताराम येचुरी का नाम, कांग्रेस संसद में उठाएगी मुद्दा.

वीरम्मा घरेलू सहायिका के तौर पर कार्य करती हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी फैलने के बाद नियोक्ताओं ने अभी तक उन्हें काम पर दोबारा नहीं बुलाया है।

यह भी पढ़े | Kangana Ranaut Meets Maharashtra Governor Bhagat Singh Koshyari: कंगना रनौत ने बहन रंगोली चंदेल संग महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से की मुलाकात (See Pics).

वीरम्मा ने अपनी दो साल की पोती की ओर दुखी मन से देखते हुए कहा, ‘‘मेरे पति चल-फिर नहीं सकते। मेरा बेटा दिहाड़ी मजदूर है, उसके पास भी आजकल ज्यादा काम नहीं है। हमारे पास अपने परिवार के एक सप्ताह के भोजन के लिए पर्याप्त राशन नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी पोती के दूध के लिए भी हमारे पास पैसे नहीं हैं। यदि हम भीख भी मांगेंगे, तो हमें कुछ नहीं मिलेगा। हमारे लिए समय इतना मुश्किल भरा कभी नहीं रहा।’’

उच्चतम न्यायालय ने गत 31 अगस्त को दिल्ली में पटरियों के किनारे से 48,000 झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया था। एक अनुमान के अनुसार, नारायणा विहार, आजादपुर शकूर बस्ती, मायापुरी, श्रीनिवासपुरी, आनंद पर्बत और ओखला में झुग्गियों में लगभग 2,40,000 लोग रहते हैं।

उत्तर रेलवे ने शीर्ष न्यायालय को इस बाबत एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि रेल पटरियों के किनारे झुग्गियां पटरियों को साफ सुथरा रखने में बाधक हैं।

पंचवर्ण (55) ने कहा कि उनका परिवार चेन्नई से दिल्ली आया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि यह जमीन सरकार की है, लेकिन हम कहां जाएंगे? हमारी जिम्मेदारी कौन लेगा?’’

एलुमलाई (35) ने चुनावों से पहले सरकार द्वारा किये गये वादे-- ‘जहां झुग्गी, वहीँ मकान’ -- को याद दिलाया।

एलुमलाई के पिता 1978 में चेन्नई से दिल्ली आए थे। एलुमलाई ने कहा, ‘‘हम यह नहीं कहते कि हम शीर्ष न्यायालय के के आदेश को नहीं मानेंगे। यह जमीन रेलवे की है और वे इसे एक दिन में (खाली करा) लेंगे, लेकिन हम कहां जाएंगे? कोई भी हमारी परवाह नहीं करेगा।’’

दिलचस्प बात है कि हर झुग्गी में बिजली का कनेक्शन है। उसमें रहने वाले लोगों के पास आधार कार्ड और राशन कार्ड हैं।

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने पिछले वर्ष झुग्गीवासियों के लिए सामुदायिक शौचालय बनाये थे, ताकि कोई भी खुले में या पटरी के किनारे शौच नहीं करे।

एक चालक के तौर पर कार्यरत 45 वर्षीय शंकर सरांगम को कोविड-19 के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान तीन महीने से वेतन नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘वेतन आधा हो गया है। मेरा परिवार है जिसका भरण पोषण करना है। हम भगवान के शुक्रगुजार थे कि हमारे सिर पर एक छत थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब झुग्गी भी चली जाएगी। रेलवे को कम से कम इस कदम के समय पर विचार करना चाहिए था। महामारी का प्रभाव अगले तीन वर्षों तक रहेगा।’’

श्रीनिवासपुरी में स्थित एक अन्य झुग्गी में 40 वर्षीय रमनाधार मंडल ने सवाल किया, ‘‘जब नेता हमारा पुनर्वास नहीं कर सकते तो वे हमसे वोट क्यों मांगते हैं? हम कहां जाएंगे..फुटपाथ पर?’’

बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले मंडल की दो बच्चियां हैं, जो अभी चलना सीख रही हैं।

उन्होंने करबद्ध निवेदन किया, ‘‘इन बच्चों के बारे में सोचिये। हमें रातें खुले में वर्षा और सर्दियों में गुजारनी होगी।’’

25 वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के माल्दा से दिल्ली आये गुनोधर मंडल को एक ‘‘उचित पुनर्वास’’ का अधिक भरोसा नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे डर है कि हमें शहर छोड़कर वापस गांव जाने के लिए कहा जाएगा। हमारे पास वहां कुछ भी नहीं है।’’

जमीन खाली कराने के संबंध में रेलवे द्वारा जारी किए गए नोटिसों को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है।

आप प्रवक्ता एवं विधायक राघव चड्ढा ने शुक्रवार को निवासियों को भेजे गए नोटिस पर कहा कि जब तक ‘‘केजरीवाल जिंदा हैं’’ कोई भी उनकी झुग्गियां नहीं तोड़ सकता।’’

दिल्ली भाजपा ने आरोप लगाया है कि पांच साल से अधिक समय से सत्ता में रहने के बावजूद आप ने शहर में झुग्गियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए बहुत कम काम किया है।

अरविंद केजरीवाल सरकार का कहना है कि रेलवे दिल्ली में पटरियों के किनारे स्थित झुग्गियों को पुनर्वास नीति, 2015 के प्रावधानों के अनुसार निवासियों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना ध्वस्त नहीं कर सकता।

रेलवे ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार काम कर रहा है। रेलवे ने हालांकि इस मुद्दे पर विस्तार से बोलने से इनकार कर दिया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\