देश की खबरें | दिल्ली दंगे: अदालत ने यूएपीए मामले में जामिया की छात्रा गुलफिशा फातिमा की जमानत अर्जी खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगे से जुड़े एक मामले में अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार की गयी जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा गुलफिशा फातिमा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगे से जुड़े एक मामले में अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार की गयी जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा गुलफिशा फातिमा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

फातिमा ने इस मामले में जांच की अवधि बढ़ाने के सत्र अदालत के 29 जून के आदेश को चुनौती दी थी। उसने इस आधार पर वैधानिक जमानत मांगी थी कि कानून के अनुसार 90 दिनों के अंदर आरोपपत्र दायर नहीं किया गया।

यह भी पढ़े | मुंबई के जुहू बीच पर गणपति बप्पा का विसर्जन: 1 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने इस आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी कि उसमें दम नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने कहा, ‘‘ जब जांच करने की अवधि 29 अगस्त तक बढ़ायी गयी और आवेदक (फातिमा) को सत्र न्यायाधीश ने यूएपीए के प्रावधानों के तहत न्यायिक हिरासत में भेजा तब आवेदक द्वारा यह कहने का कोई कारण नहीं है कि आरोपपत्र दस अगस्त को दायर नहीं किया गया। आवेदक ने सत्र न्यायाधीश द्वारा 29 अगस्त को जांच की अवधि बढ़ाये को यह कहते हुए चुनौती देने की कोशिश की कि वह ऐसा आदेश जारी करने के लिए सक्षम नहीं हैं। लेकिन ऐसा कथन इस अदालत के समक्ष नहीं कहा जा सकता है।’’

यह भी पढ़े | India-China Border Tension: भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर अर्जुन रामपाल ने उठाया सवाल, पूछा- इस विवाद पर सब शांत क्यों हैं? इससे जरुरी मुद्दा क्या हो सकता है?.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ 29 जून को आदेश जारी किया गया था और उस आदेश के मुताबिक जांच की अवधि 29 अगस्त तक बढ़ायी गयी (बाद में उसे और बढ़ाया गया।) इसलिए इस आधार पर वैधानिक जमानत के प्रश्न पर विचार का कोई अवसर पैदा ही नहीं होता कि अंतिम रिपोर्ट दस अगस्त को नहीं दाखिल की गयी। वर्तमान आवेदन में कोई दम नहीं है, इसलिए उसे खारिज किया जाता है।’’

अदालत ने 29 जून को जांच पूरी करने के लिए पहले 29 अगस्त तक और फिर 13 अगस्त को यह अवधि 17 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी थी।

फातिमा की जमानत अर्जी में दावा किया गया है कि सत्र अदालत पुलिस द्वारा यूएपीए की धारा 43डी (2) (बी) के तहत दाखिल आवेदन पर गौर करने और मंजूर करने के लिए सक्षम नहीं है जिसमें जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की गयी थी।

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद उत्तरपूर्वी दिल्ली में 24 अगस्त को सांप्रदायिक दंगे भड़क गये थे। इस दंगे में कम से कम 53 लोगों की जान चली गयी थी और करीब 200 लोग घायल हो गये थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\