देश की खबरें | दिल्ली दंगा : अदालत ने खालिद की जमानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख पूछा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी 2020 में यहां दंगों के पीछे कथित साजिश से संबंधित गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई 6 मई तक के लिए टाल दी।
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी 2020 में यहां दंगों के पीछे कथित साजिश से संबंधित गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई 6 मई तक के लिए टाल दी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने देशद्रोह के कानून की संवैधानिक वैधता पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष आगामी सुनवाई के मद्देनजर सुनवाई टाल दी और इसी मामले में शरजील इमाम की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस का रुख पूछा।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका को खारिज करने के खिलाफ इमाम की याचिका पर नोटिस जारी किया और शीर्ष अदालत द्वारा पांच मई को आईपीसी की धारा 124ए की वैधता के मुद्दे पर विचार करने के बाद इसे खालिद की याचिका के साथ आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील त्रिदीप पाइस ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के “ सुनवाई उसी दिन समाप्त करने की संभावना नहीं है” और वर्तमान जमानत की कार्यवाही केवल धारा 124 ए तक सीमित नहीं है, बल्कि यूएपीए के प्रावधानों से संबंधित है।
पीठ ने कहा, “किसी भी चीज का, जिसका भले ही दूर से ही सही असर हो सकता है, तो हमें (उसके लिए) इंतजार करना चाहिए। जैसा आपने कहा, परिणाम महत्वपूर्ण होने जा रहा है।”
पीठ में न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर भी शामिल हैं। अदालत ने आगे कहा कि इमाम और खालिद को मामले में “सह-साजिशकर्ता” बताया गया था और इस तरह वह दोनों जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी।
इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने जोर देकर कहा कि उच्चतम न्यायालय में देशद्रोह के मुद्दे पर सुनवाई हो रही है, उनकी याचिका जमानत के लिए है।
अदालत ने कहा, “अगर हमें सह-आरोपी को सुनना है, तो हम इसे एक बार में भी कर सकते हैं।” अदालत ने दिल्ली दंगों के एक अलग मामले में इमाम की एक और जमानत याचिका को भी 6 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
खालिद, इमाम और कई अन्य पर फरवरी 2020 के दंगों के “मास्टरमाइंड” होने के लिए यूएपीए मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे।
संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की थी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 29, 2022 01:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

