देश की खबरें | दिल्ली दंगे : अदालत ने एक व्यक्ति को दंगे, आगजनी के आरोपों से बरी किया

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नयी दिल्ली, 13 अगस्त राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में एक व्यक्ति को संदेह का लाभ देते हुए दंगे और आगजनी के आरोपों से बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी ने 24 फरवरी, 2020 को मेन करावल नगर रोड पर एक दुकान में आग लगाने वाली दंगाई भीड़ के हिस्से के रूप में आरोपी के तौर पर नूर मोहम्मद की पहचान करने के संबंध में ‘‘शायद बनावटी दावा’’ किया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने 11 अगस्त के एक फैसले में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए हैं और आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है। इसलिए, आरोपी को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।’’

अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ‘‘कोई संदेह नहीं’’ है कि दुकान में ‘‘दंगाइयों द्वारा तोड़फोड़ की गई और आगजनी की गई।’’

दंगाई भीड़ के हिस्से के रूप में नूर मोहम्मद की पहचान के संबंध में, न्यायाधीश प्रमाचला ने एक पुलिस कांस्टेबल की गवाही पर गौर किया, जिसने दो अप्रैल, 2020 को थाने के अंदर आरोपी की पहचान करने के बारे में गवाही दी थी, जब मोहम्मद से दंगे के एक अन्य मामले में उसकी कथित संलिप्तता के लिए पूछताछ की जा रही थी।

अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित जांच अधिकारी मोहम्मद को एक अन्य मामले के संबंध में एक अप्रैल को घटनास्थल पर ले गया था और उस समय कांस्टेबल उसके साथ मौजूद था।

अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, उस दिन कांस्टेबल ने वर्तमान मामले में मोहम्मद की संलिप्तता के बारे में जांच अधिकारी को सूचित नहीं किया।’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ऐसे में यह संभव है कि दुकान पर हुई घटना के पीछे आरोपियों को दंगाइयों के बीच देखे जाने का बनावटी दावा किया गया हो, अन्यथा, वह (कांस्टेबल) एक अप्रैल को ही वर्तमान मामले में आरोपी की संलिप्तता के बारे में जांच अधिकारी को सूचित नहीं कर सकता था।’’ अदालत ने कहा कि इस प्रकार, कांस्टेबल की गवाही विश्वसनीय नहीं थी।

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, दुकान में घटना के समय भीड़ में आरोपी की मौजूदगी अच्छी तरह से स्थापित नहीं होती है।’’

खजूरी खास थाने ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

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