देश की खबरें | दिल्ली : एफएसएल में पिछले साल अगस्त से अबतक पांच से अधिक नार्को जांच की गई
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नयी दिल्ली, 20 मार्च दिल्ली में पिछले साल फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की शुरुआत होने के बाद से पांच से अधिक नार्को जांच की गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एफएसएल ने उत्तर भारत में पहले नार्को विश्लेषण सुविधा की शुरुआत यहां अम्बेडकर अस्पताल के साथ साझेदारी में शुरू की है।
एफएसएल की निदेशक दीपा वर्मा ने बताया कि इस प्रयोगशाला को शुरू करने की पिछले दो साल से कोशिश की जा रही थी। उन्होंने बताया, हालांकि पहली जांच नौ अगस्त 2021 को यहां पर की गई।
उल्लेखनीय है कि नार्को जांच के दौरान व्यक्ति को इंजेक्शन के जरिये दवा दी जाती है, जिससे वह सम्मोहित अवस्था में पहुंच जाता है और उसकी कल्पना करने की क्षमता कुंद पड़ जाती है। इस दौरान उम्मीद की जाती है कि वह सही जानकारी देगा।
वर्मा ने कहा,‘‘नार्को विश्लेषण संदिग्ध को दवा देने के बाद किया जाता है और इसलिए ऐसा करने के लिए अदालत के निर्देश की आवश्यकता होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रयोगशाला इसमें अहम भूमिका निभाती है। हमें अस्पताल से सहयोग की भी जरूरत होती है, क्योंकि यह जांच ऑपरेशन थियेटर में की जाती है ताकि संदिग्ध चिकित्सा निगरानी में रहे।’’
एफएसएल की निदेशक ने कहा कि जांच के दौरान संदिग्ध के महत्वपूर्ण मानकों (यथा शरीर के तापमान, स्पंदन दर, श्वसन दर और रक्तचाप) पर नजर रखने के लिए टीम की मौजूदगी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकिया के दौरान मनोचिकित्सक और डॉक्टरों दोनों की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे शुरू करने में दो साल लगे। उत्तर भारत में इस तरह की यह पहली सुविधा है। इस तरह की सुविधा को स्थापित करने के लिए बहुत प्रयास करने पड़ते हैं, मसलन इसे कैसे स्थापित किया जाएगा, इसके लिए क्या जरूरत प़ड़ेगी, कैसी तैयारी करनी होगी, अन्य जरूरतों के साथ कैसी चिकित्सा टीम बनाई जाएगी।’’
वर्मा ने कहा, ‘‘कोविड-19 की वजह से प्रशिक्षण भी आसान नहीं था और इसलिए इन तैयारियों में समय लगा। अन्यथा, हम इस सुविधा को एक साल पहले शुरू कर चुके होते।’’
उन्होंने बताया कि छह से सात संदिग्धों के लिए सत्र आयोजित किया गया और सभी दिल्ली के थे।
वर्मा ने कहा कि जो भी मामले नार्को जांच के लिए आए वे ‘संवेदनशील’ थे। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसियां यह जांच तब कराती हैं, जब पहले से मौजूद अन्य सबूतों से मामले की सही तस्वीर नहीं उभरती है।
उन्होंने कहा कि इसे उच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू किया गया है।
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