नयी दिल्ली, 26 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि दिव्यांग व्यक्तियों के मामलों से निपटने में अधिकारियों का रवैया ‘‘लापरवाह, शिष्टाचार रहित और असंवेदनशील’’ है। अदालत ने ‘‘दयनीय स्थिति को लेकर दुख व्यक्त किया।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं होने के बावजूद नागरिकों को अपना हक पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी दिव्यांगों के लिए काम करने वाली सोसाइटी ‘तोशियास’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। सोसाइटी ने याचिका में अनुरोध किया है कि उच्च न्यायालय दिव्यांगों के लिए मुख्य आयुक्त की अदालत द्वारा 25 अक्टूबर 2019 को पारित आदेश को लागू कराने का निर्देश दे।
याचिकाकर्ता सोसाइटी ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह केंद्र और रेलवे को दिव्यांगों के रोजगार से जुड़े 2019 के आदेश को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दे।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा, ‘‘भारत सरकार ने इस देश के समाज और नागरिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनाई हैं लेकिन नागरिकों को इन योजनाओं का लाभ लेने के मामले में अपने हाल पर छोड़ दिया गया है जैसा कि इस मामले में है।’’
अदालत को सूचित किया गया कि प्रतिवादी प्राधिकारी मामले का प्रभावी तरीके से निस्तारण करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं जो पिछले साल से लंबित है और याचिकाकर्ता अपनी शिकायतों के समाधान के लिए संघर्ष कर रहा है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल को मामले में प्रतिवादी का पक्ष रखने और मामले के बिंदुओं की प्रभावी सुनवाई में अदालत की मदद करने को कहा।
अदालत ने विधि अधिकारी को स्पष्ट और सटीक निर्देश प्राप्त करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY