नयी दिल्ली, 17 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीयू और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीआईसी) से विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं के लिए उचित सुरक्षा उपायों और शर्तों के साथ एक तंत्र विकसित करने पर विचार करने को कहा है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने माना कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में ऑफलाइन उपस्थिति का एक अलग महत्व है, लेकिन उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा में निरंतर विकास "प्रभावी दूरस्थ शिक्षा तंत्र" विकसित करने का एक अवसर है।
अदालत ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के उस निर्णय के खिलाफ कानून के छात्रों की याचिकाओं को खारिज करते हुए की जिसमें उपस्थिति की कमी के कारण उन्हें संबंधित सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी।
अदालत ने इस आधार पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि रिट क्षेत्राधिकार के तहत कुल उपस्थिति की आवश्यकता में कोई छूट नहीं दी जा सकती, लेकिन अधिकारियों को ऑनलाइन कक्षाओं के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उच्च न्यायालय ने 11 फरवरी को पारित आदेश में कहा था, “दिल्ली विश्वविद्यालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया उचित सुरक्षा उपायों और शर्तों के साथ एक ऐसा तंत्र विकसित करें जिसके तहत छात्र ऑनलाइन कक्षाएं ले सकें।”
उन्होंने कहा, “ न्यायालय इस तथ्य से अवगत है कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में ऑफलाइन उपस्थिति का अलग महत्व होता है। हालांकि, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा का निरंतर विकास विशेषज्ञों को प्रभावी दूरस्थ शिक्षा तंत्र विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।”
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