देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीएफआई जांच रद्द करने के अनुरोध पर एनआईए से उसका रूख जानना चाहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से देश में आतंकवादी गतिविधियां चलाने की कथित आपराधिक साजिश के सिलसिले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ चल रही उसकी जांच को खारिज करने की एक अर्जी पर उसका जवाब मांगा।

नयी दिल्ली, 21 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से देश में आतंकवादी गतिविधियां चलाने की कथित आपराधिक साजिश के सिलसिले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ चल रही उसकी जांच को खारिज करने की एक अर्जी पर उसका जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने गिरफ्तार पीएफआई नेता ओमा सलाम की याचिका पर नोटिस जारी किया और एनआईए से जवाब दाखिल करने को कहा।

न्यायमूर्ति सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में ‘स्थगन का प्रश्न ही नहीं है’ । उसपर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह भी ‘‘इसके लिए दबाव नहीं बना रहे हैं।’’

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वह ‘कानूनी आधार’ पर एनआईए मामले की निंदा कर रहे हैं क्योंकि जांच एनआईए अधिनियम के मुताबिक नहीं की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जिन अपराधों की एनआईए जांच कर रही है, उन्हें पहले राज्य सरकार द्वारा पृजीकृत किया जाता जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

यह मामला पिछले साल अप्रैल में दर्ज किया गया था, जिसका संबंध पीएफआई से जुड़े सदस्यों द्वारा भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों के वास्ते देश-विदेश में धन जुटाने की कथितसाजिश से है।

एनआईए ने आरोप लगाया है कि आरोपी अपने संगठन के कार्यकर्ताओं को कट्टरपंथ सिखा रहे हैं और आतंकवादी गतिविधियां चलाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

देश में 28 सितंबर, 2022 को पीएफआई पर पाबंदी लगाये जाने से पहले कई छापों में विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में उसके कथित कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया।

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