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देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगर निकाय एजेंसियों के बीच ‘भ्रम’ का उल्लेख किया, केंद्रीकरण का आह्वान किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने जिम्मेदारियों का ठीक निर्धारण नहीं होने के कारण विभिन्न नगर निकाय एजेंसियों के बीच व्याप्त ‘‘भारी भ्रम’’ का सोमवार को संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासन और प्रबंधन को केंद्रीकृत करने पर निर्णय लेने को कहा।

देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगर निकाय एजेंसियों के बीच ‘भ्रम’ का उल्लेख किया, केंद्रीकरण का आह्वान किया

नयी दिल्ली, 28 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने जिम्मेदारियों का ठीक निर्धारण नहीं होने के कारण विभिन्न नगर निकाय एजेंसियों के बीच व्याप्त ‘‘भारी भ्रम’’ का सोमवार को संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासन और प्रबंधन को केंद्रीकृत करने पर निर्णय लेने को कहा।

न्यायालय जलभराव और वर्षा जल संचयन के अलावा मानसून और वर्ष के अन्य समय में राष्ट्रीय राजधानी में यातायात जाम को कम करने से संबंधित दो स्वतः संज्ञान याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी एस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि बरसाती पानी की नालियां दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के प्रबंधन के अधीन हैं और सीवेज लाइनें दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अधीन हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘ इससे दोनों लाइनों का रखरखाव नहीं हो पा रहा है जिससे दिल्ली में अत्यधिक पानी जमा हो रहा है। इनमें से किसी भी नाली के पाइप का संबंधित एजेंसी द्वारा उचित प्रबंधन नहीं किया जा रहा है और ऐसा लगता है कि जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाली जा रही है।’’

पीठ ने कहा कि ज़्यादातर कॉलोनियों में निवासियों या निर्माण कार्यों के कारण बरसाती पानी की नालियां अवरुद्ध हो जाती हैं और लगातार जाम रहती हैं।

लंबित याचिका में महारानी बाग़ के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा एक नयी याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्रवाई के कारण एक नई समस्या उत्पन्न हो गई है।

अदालत महारानी बाग कॉलोनी से सटे तैमूर नगर नाले से संबंधित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और समय-समय पर निर्देश जारी कर रही है।

अदालत को बताया गया कि रिंग रोड पर दीवारों में कुछ निशान या छेद बनाए गए थे जिनसे पानी महारानी बाग कॉलोनी में आगया और पूरे इलाके में भर गया।

लोक निर्माण विभाग ने तर्क दिया कि ये नए छेद नहीं थे बल्कि पहले से मौजूद थे। उन्हें निवासियों ने पूर्व में बंद कर दिया था लेकिन अब उन्हें खोल दिया गया है।

अदालत को बताया गया कि इस सड़क का जिम्मा पहले पीडब्ल्यूडी के पास था लेकिन अब एमसीडी के पास है।

पीठ ने कहा कि निवासियों की याचिका से पता चलता है कि दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों के काम करने के कारण उदासीनता व्याप्त है।

अदालत ने कहा कि उसे आम सहमति बनाने और उसके निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, डीजेबी, डीडीए, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग सहित एजेंसियों को अपने समक्ष बुलाना होगा।

अदालत ने कहा, ‘‘ इन एजेंसियों के बीच भारी भ्रम की स्थिति है, जो जिम्मेदारियों के ठीक निर्धारण नहीं होने के कारण उत्पन्न होती है और इसके कारण अधिकांश मौकों पर जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल दी जाती है।’’

पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि दिल्ली सरकार इस बारे में व्यापक निर्णय ले कि दिल्ली में नागरिक सेवाओं का प्रबंधन और प्रशासन किस प्रकार किया जाना चाहिए।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2025 09:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).