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दिल्ली जिमखाना क्लब ने सरकार की याचिका पर सवाल उठाए

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की याचिका को ‘‘पूरी तरह गलत समझने, गलत तरीके से पेश करने और सुनवाई योग्य नहीं होने लायक’’ करार देते हुए क्लब ने अपने जवाबी हलफनामे में यह भी कहा कि यह निजी क्लब है जिसकी स्थापना इसके सदस्यों के इस्तेमाल के लिए की गयी और इसमें जनहित का कोई तत्व शामिल नहीं है।

दिल्ली जिमखाना क्लब ने सरकार की याचिका पर सवाल उठाए
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नयी दिल्ली, 17 मई सरकार के दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ होने के बीच क्लब के प्रबंधन ने एनसीएलटी के समक्ष दायर याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘‘इसमें बदनीयति’’ झलकती है।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की याचिका को ‘‘पूरी तरह गलत समझने, गलत तरीके से पेश करने और सुनवाई योग्य नहीं होने लायक’’ करार देते हुए क्लब ने अपने जवाबी हलफनामे में यह भी कहा कि यह निजी क्लब है जिसकी स्थापना इसके सदस्यों के इस्तेमाल के लिए की गयी और इसमें जनहित का कोई तत्व शामिल नहीं है।

मंत्रालय का आरोप है कि क्लब की आम समिति ने कथित तौर पर ‘‘धोखाधड़ी और कुप्रबंधन’’ किया और कंपनी अधिनियम, 2003 की धारा 241 और 242 के तहत प्रबंधन का नियंत्रण लेने का प्रयास किया।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की प्रधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। इसकी सुनवाई पिछले हफ्ते वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई और सोमवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

क्लब की याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता ने इस याचिका को जिस तरह से दायर किया, वह निराशाजनक है और प्रतिवादी को पहले से कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। यह कार्रवाई अपने आप में बुरी नियत से की गई प्रतीत होती है।’’

इसमें यह भी गौर किया गया कि वर्तमान सदस्यता ‘‘न तो आनुवांशिक है न ही हस्तांतरण योग्य हैं’’ क्योंकि यह कंपनी लिमिटेड है।

सरकार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सदस्यता का आनुवांशिक उत्तराधिकार ‘‘परिवारवाद’’ है और ‘‘यह लोकतांत्रिक नैतिक का न्यूनतम अनुपालन है।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2020 08:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).