देश की खबरें | दिल्ली सरकार का बिना ‘वर्षाजल संचयन प्रणाली’ वाली संपत्तियों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव

नयी दिल्ली, पांच जुलाई दिल्ली सरकार ने कम से कम 100 वर्ग मीटर में बने मकानों के उन मालिकों पर पांच लाख रुपये तक की पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने का प्रस्ताव रखा है जिनमें चालू स्थिति में वर्षाजल संचयन प्रणाली नहीं है।

हाल में राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपी एक रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने कहा कि गैर आवासीय इकाइयों के लिए जुर्माना 50 प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है।

सरकार ने 100 वर्गमीटर से 500 वर्गमीटर तक के भूखंड वाली संपत्तियों के लिए 50,000 रुपये, 501 वर्गमीटर से 2000 वर्गमीटर तक के भूखंड वाली संपत्तियों पर एक लाख रुपये, 2000 वर्गमीटर से 5000 वर्गमीटर तक के भूखंड वाली संपत्तियों पर दो लाख रुपये तथा 5000 वर्गमीटर से अधिक के भूखंड वाली संपत्तियों पर पांच लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाने का सुझाव दिया है।

दिल्ली सरकार ने 2012 में वर्षाजल संचयन प्रणाली लगाने को अनिवार्य किया था और यह व्यवस्था की थी कि जो इसका पालन नहीं करेगा, उसपर पानी बिल का डेढ़ गुना जुर्माना लगेगा। जिन संपत्तियों पर वर्षाजल संचयन प्रणाली होगी, उसमें पानी के बिल में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

दिल्ली सरकार ने यह भी कहा है कि दिल्ली जल बोर्ड को उन सोसायटियों और संस्थानों को पानी के बिल में दी गयी छूट वापस लेने को कहा गया है जिनके यहां वर्षाजल संचयन प्रणाली चालू स्थिति में नहीं है।

एनजीटी ने फरवरी में दिल्ली के मुख्य सचिव को उस याचिका पर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था जिसमें दावा किया गया था कि द्वारका में कई सोसायटियों में चालू वर्षाजल संचयन प्रणाली नहीं है।

अधिकरण ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से दिल्ली जल बोर्ड के साथ समन्वय कायम करने, उपचारात्मक उपाय करने, जागरूकता फैलाने तथा भूजल दोहन रोकने को कहा था।

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