देश की खबरें | दिल्ली: छह साल की बच्ची की भोजन की नली से अवरोध को हटाने में डॉक्टरों की मिली सफलता

नयी दिल्ली, 22 जुलाई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में छह साल की एक ऐसी बच्ची को नई जिंदगी मिली है जिसकी भोजन नली और पेट को जोड़ने वाले स्थल के अवरुद्ध होने से वह लगभग तीन वर्षों से खाना नहीं खा पा रही थी। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस अवरोध को हटाने के लिए बच्ची का ‘एंडोस्कोपिक’ प्रक्रिया से ऑपरेशन किया गया।

डॉक्टरों का दावा है कि ‘पर ओरल एंडोस्कोपिक मायोटॉमी’ (पीओईएम) प्रक्रिया से गुजरने वाली यह बच्ची भारत में सबसे कम उम्र की मरीज है। अस्पताल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि छाती या उदर में बिना चीरा लगाए इस नवीन और उन्नत प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

बयान में कहा गया कि इस तरह के ऑपरेशन के बाद मरीज को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में नहीं रहना पड़ता। अस्पताल के उदर एवं पाचन तंत्र (गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी) विभाग में हाल में बच्ची को भर्ती किया गया था जो लगभग तीन साल से भोजन निगलने में असमर्थ थी।

डॉक्टरों ने कहा कि मरीज को बार-बार उल्टियां होती थीं और भोजन मुंह तथा नाक के जरिये बाहर आ जाता था जिससे उसका वजन घट गया था।

गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ अनिल अरोड़ा ने कहा, “जब वह हमारे पास आई थी तब बहुत दुबली और कमजोर थी। उसके शरीर में प्रोटीन की कमी थी और अपनी उम्र के हिसाब से उसका वजन आठ से 10 किलोग्राम कम था।”

उन्होंने कहा कि बच्चों में भोजन नहीं निगल पाने की समस्या के लिए अब तक सर्जरी की जाती थी लेकिन उक्त बच्ची के मामले में हमने एक नए प्रकार की एंडोस्कोपिक प्रक्रिया ‘पीओएएम’ अपनाने का निर्णय लिया। बयान में कहा गया कि ‘एकालेसिया कार्डिया’ (भोजन नहीं निगल पाने की समस्या) बेहद दुर्लभ समस्या है और दुनियाभर में 15 साल से कम उम्र के पांच प्रतिशत से भी कम बच्चों में यह पाई जाती है।

अरोड़ा ने कहा कि चिकित्सक दल के सामने चुनौती थी कि इतनी कम उम्र और बेहद कम वजन वाली इस बच्ची पर यह प्रक्रिया अपनाने से संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ की समस्या का जोखिम था।

उन्होंने कहा कि इस मामले में, अब तक की सबसे कम वजन और उम्र की बच्ची पर ‘पीओएएम’ प्रक्रिया अपनाई गई। बयान में कहा गया कि इसमें डेढ़ घंटे का समय लगा और बच्ची की भोजन की नली और पेट के बीच अवरोध को पूरी तरह हटाने में सफलता मिली।

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