देश की खबरें | दिल्ली की अदालत ने दहेज हत्या, क्रूरता के मामले में एक व्यक्ति और उसके परिवार को बरी किया

नयी दिल्ली, आठ फरवरी क्रूरता और दहेज हत्या के एक मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक अदालत ने यह कहते हुए एक व्यक्ति और उसके परिवार को बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष यह बात साबित नहीं कर पाया कि महिला ने आत्महत्या की थी।

अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का भी कोई तथ्य नहीं है कि दहेज के लिए महिला के साथ क्रूरता की गई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज अरोड़ा, महिला के पति प्रताप सिंह, सास भगवती देवी तथा ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि अगस्त 2017 में नीतू संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी और यह भी आरोप लगाया गया कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था।

अदालत ने 31 जनवरी को दिए गए आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष नीतू की मौत का कारण साबित नहीं कर पाया।

अदालत ने कहा, ‘‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि विसरा रिपोर्ट के अभाव में मौत के कारण को लेकर राय लंबित रखी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, महिला के शरीर पर मौत से पहले चोट के कोई निशाना नहीं मिले। यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि यह आत्महत्या का मामला था।’’

अदालत ने कहा कि मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि मई 2014 में शादी के तुरंत बाद नीतू को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा जिसके बाद सोनिया विहार पुलिस थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मामले के मुख्य गवाह ने अपने बयान से पलटते हुए कहा कि नीतू बचपन से ही मिर्गी के दौरे पड़ते थे और उसे दहेज के लिए परेशान नहीं किया गया था। मुख्य गवाहों में महिला के पिता, माता और भाई शामिल हैं।

इसने कहा कि मृतका के पिता ने यहां तक ​​कहा कि ‘‘उन्होंने अपनी बेटी और उसके ससुराल वालों के बीच झगड़े के बारे में कभी नहीं सुना’’।

अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि इसलिए, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर अभियोजन पक्ष का मामला संदिग्ध हो जाता है और संदेह का लाभ निश्चित तौर पर आरोपियों को मिलता है।

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