देश की खबरें | दिल्ली : अदालत ने नाबालिग लड़की को अगवा करने के आरोपी व्यक्ति को बरी किया

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नयी दिल्ली, 26 जुलाई दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने नाबालिग लड़की को अगवा करने के आरोपी शख्स को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी ने कथित पीड़िता को माता-पिता का घर छोड़ने के लिए बहलाया-फुसलाया था।

अदालत ने कहा कि लड़की आरोपी के साथ अपनी मर्जी से गई थी और उसे आरोपी द्वारा किसी तरह का प्रलोभन नहीं दिया गया था।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋषभ तंवर गोविंदपुरी पुलिस थाने में एक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अगवा करने) और 342 (गलत तरीके से कैद करना) के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई कर रह थे।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने 15 साल की बच्ची को 13 अप्रैल 2018 को उसके साथ जयपुर भागने के लिए मजबूर किया था।

मजिस्ट्रेट ने कहा, ''अभियोजन पक्ष पर उचित संदेह से परे आरोपी के खिलाफ मामले को साबित करने का भार है।''

उन्होंने कहा, ''दोनों पक्षों की दलीलों के मद्देनजर और सबूतों पर सावधानी से गौर करने के बाद मैं मौजूदा मामले में पाता हूं कि अभियोजन पक्ष अपने भार को उतारने में नाकाम साबित हुआ है।''

उन्होंने कहा, ''आरोपी को बरी किया जाता है।''

अदालत ने कहा, ''अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी तथ्य साबित करने में विफल रहा, जो यह दर्शाता हो कि आरोपी ने पीड़िता को अपने माता-पिता को छोड़ने के लिए बहलाया-फुसलाया हो या फिर कोई वादा किया हो। तथ्यों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता बिना किसी बहकावे के आरोपी के साथ गई थी।''

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह भी साबित करने में विफल रहा कि लड़की को गलत तरीके से बंधक बनाकर रखा गया क्योंकि उसने (पीड़िता) ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।

मजिस्ट्रेट ने कहा पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा था कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी क्योंकि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे, जो कि अदालत में दिए गए उसके (पीड़िता) बयान से ठीक विपरीत है।

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