ताजा खबरें | दिल्ली विधेयक चर्चा चार रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने विधेयक का विरोध किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
उन्होंने विधेयक का विरोध किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि सरकार को निगमों में पार्षदों की संख्या को घटाने की बजाय बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पार्षदों की संख्या 500 करने की मांग की।
कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि जब दिल्ली के नगर निगम को तीन भागों में विभाजित किया गया था तब की शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार ने दो विशेषज्ञ समितियों के रिपोर्ट को इस कदम का आधार बनाया था जबकि केंद्र की वर्तमान सरकार ने बगैर किसी चर्चा के निगमों के एकीकरण का फैसला कर लिया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली भाजपा के नेताओं ने केंद्र सरकार से दिल्ली का चुनाव टालने को कहा और फिर उसके बाद यह विधेयक लाया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘सौतेली मां और बेटे की नूराकुश्ती में सरकार यह विधेयक लेकर आई है।’’
उन्होंने कहा कि जो इतिहास से नहीं सीखता है वह इतिहास बन जाता है।
गोहिल ने कहा कि विधेयक में कई जगहों पर ‘‘संघ सरकार’’ के स्थान पर ‘‘केंद्र सरकार’’ शब्द का उल्लेख किया गया है जो संघीय व्यवस्था का उल्लंघन है।
उन्होंने अनुरोध किया कि इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए ताकि विस्तार से इस पर चर्चा हो सके।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि कई विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि चुनाव टालने के लिए सरकार तीनों नगर निगमों का एकीकरण कर रही है लेकिन सच्चाई है कि महाराष्ट्र की सरकार बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चुनाव टाल रही है और उस सरकार में कांग्रेस भी सहयोगी है।
उन्होंने कहा कि विधेयक का विरोध करने वालों के लिए नगर निगमों का बंटवारा इतना ही जनहित में है तो कोलकाता और चेन्नई के नगर निगमों को वहां की सरकारें बंटवारा क्यों नहीं कर रही हैं।
राव ने इस दौरान कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेामल किया, जिसका कि आप के संजय सिंह ने भारी विरोध किया।
इसे लेकर थोड़ी देर सदन में हंगामा भी हुआ।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि संख्या के बल पर यह विधेयक पारित भी हो जाएगा लेकिन सरकार को सहकारी संघवाद की भावना का उल्लंघन करने के लिए आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।
उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कोई भी इसका समर्थन नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘इतिहास कभी आपसे यह सवाल ना करे जो सवाल आज हम आपातकाल के लिए कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार है और यह विधेयक वहां की विधानसभा से पारित होकर आता तो सहकारी संघवाद का बेहतर सबूत होता।
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि विधेयक को सदन में लाने से पहले यदि दिल्ली के विधायकों की राय ले ली जाती तो बेहतर होता।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह फिर से इस विधेयक पर पुनर्विचार करे और दिल्ली सरकार से सलाह मशविरे के बाद ही कोई निर्णय ले।
भाजपा के विवेक ठाकुर ने कहा कि तीनों नगर निगमों का एकीकरण अनिवार्य हो गया था क्योंकि इसके बंटवारे का सबसे बड़ा दंश दिल्ली की जनता को झेलना पड़ा।
उन्होंने कहा कि केंद्र की इस पहल में दिल्ली की सरकार को सहयोग करना चाहिए और मिलजुलकर दिल्ली के हित में निर्णय लेना चाहिए।
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