देश की खबरें | दिल्ली के विधानसभा अध्यक्ष ने वित्त विभाग पर घाना यात्रा के प्रस्ताव को रोके रखने का आरोप लगाया
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नयी दिल्ली, एक सितंबर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार का वित्त विभाग राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने से जुड़ी उनकी घाना यात्रा के प्रस्ताव को रोके हुए है और कह रहा है कि उपराज्यपाल की मंजूरी जरूरी है ।
गोयल ने विधानसभा में संवाददाता सम्मेलन में यह भी आरोप लगाया कि सेवा विभाग के अधिकारियों ने विधानसभा प्रकोष्ठ के अधिकारियों को तलब किया तथा उनसे ओबीसी कल्याण समिति द्वारा की जा रही जांच के बारे में गोपनीय सूचना मांगी एवं नहीं देने पर उन्हें निलंबित करने की ‘धमकी दी’।
गोयल ने कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल वी के सक्सेना को पत्र लिखकर अपनी शक्ति का कथित रूप से ‘दुरुपयोग करने’ तथा विशेष सचिव (सतर्कता) के खिलाफ शिकायत की जांच के बारे में गोपनीय सूचना मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र के वित्त एवं विदेश मंत्रालयों से मंजूरी मिलने के बाद भी वित्त विभाग के पास उनकी घाना यात्रा का प्रस्ताव जून से लंबित है। यह यात्रा अक्टूबर में होने वाली है।
उन्होंने कहा, ‘‘ अब दो महीने बाद मुझसे कहा गया है कि उन्हें (प्रस्ताव संबंधी कागजात को) इस टिप्पणी के साथ सचिवालय में वापस भेज दिया गया हैं कि उपराज्यपाल की मंजूरी जरूरी है। ये सम्मेलन हर साल होते हैं तथा उपराज्यपाल की मंजूरी कभी नहीं मांगी जाती है क्योंकि विधानसभाध्यक्ष उपराज्यपाल के नीचे काम नहीं करते हैं और जिस किसी मंजूरी की जरूरत होती है, वह भारत सरकार द्वारा दी जाती हैं।’’
गोयल ने कहा कि पिछले साल बिना किसी आपत्ति के उन्होंने कनाडा में इसी सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा कि इस मौजूदा मामले में वित्त विभाग ने उनकी मंजूरी तो अटका रखी है, लेकिन उनके साथ जाने वाले विधानसभा के दो अधिकारियों की यात्रा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
फिलहाल विधानसभाध्यक्ष के आरोप पर वित्त विभाग की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।
गोयल ने आरोप लगाया, ‘‘ विधानसभा सचिवालय द्वारा वित्त विभाग को भेजे जाने वाले करीब करीब सभी प्रस्तावों को बिना किसी कारण के रोक लिया जाता है और तुच्छ आपत्तियों के साथ लौटा दिया जाता है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त विभाग ने विधानसभा सचिवालय द्वारा भेजे गये वित्तीय प्रस्तावों में ‘देरी करने और उन्हें नामंजूर करने’ में कोई कसर नहीं छोड़ी है । उन्होंने दावा किया कि कैंटीन भुगतान, ई- विधान परियोजना को लागू करने के लिए परामर्शदाता की नियुक्ति जैसी फाइलें वित्त विभाग के पास अटकी हुई हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि विशेष सचिव (सेवा/सतर्कता) वाई वी वी जे राजशेखर और उपसचिव (सेवा) ने विधानसभा सचिवालय के दो खंड अधिकारियों को बुलाया और उनके साथ सहयेाग नहीं करने पर उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई करने या तबादला कर देने की धमकी दी।
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