जरुरी जानकारी | भुगतान में देरी, बिजली खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां: इक्रा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं लगाने वाली कंपनियों को भुगतान में देरी तथा बिजली खरीद और बिक्री समझौते पर हस्ताक्षर मामले में धीमी प्रगति क्षेत्र के विकास के रास्ते में प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह कहा।

नयी दिल्ली, 25 अगस्त नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं लगाने वाली कंपनियों को भुगतान में देरी तथा बिजली खरीद और बिक्री समझौते पर हस्ताक्षर मामले में धीमी प्रगति क्षेत्र के विकास के रास्ते में प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह कहा।

इक्रा रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख गिरीश कुमार कदम ने कहा कि वित्त वर्ष 2029-30 तक 4,50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य के साथ अनुकूल नीति तथा प्रतिस्पर्धी शुल्क दरों को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश संभावनाएं मजबूत बने रहने की उम्मीद है। मध्यम अवधि में बिजली क्षेत्र में क्षमता वृद्धि को गति नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से मिलेगी। इस क्षेत्र में 40,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।

कदम ने इक्रा की रिपोर्ट में कहा कि हालांकि वृद्धि के रास्ते में मुख्य चुनौती क्रियान्वयन के स्तर पर है। यह मुख्य रूप से जमीन और पारेषण ढांचागत सुविधाओं से संबद्ध है। इसके अलावा बिजली खरीद समझौतों और बिजली बिक्री समझौतों के मामले में धीमी गति भी एक चुनौती है। हालांकि इस मामले में सुधार हो रहा है।

क्रियान्वयन स्तर पर चुनौती के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं लगाने वाली कंपनियों के समक्ष समस्या सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों से होने वाले भुगतान में देरी और ग्रिड से जुड़ी हुई हैं। ग्रिड से जुड़ी चुनौती कुछ राज्यों में खासकर उच्च शुल्क दरों वाली परियोजनाओं को लेकर है।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिये परिदृश्य स्थिर बना हुआ है। इसका कारण सरकार की तरफ से नीतिगत समर्थन, अच्छी-खासी परियोजनाओं का क्रियान्वयन के स्तर पर होना और शुल्क के मामले में सौर तथा पवन ऊर्जा परियोजनाओं द्वारा प्रतिस्पर्धी दर की पेशकश है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आयातित सेल और मोड्यूल पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाये जाने, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना तथा कई परियोजनाओं के लिये घरेलू मोड्यूल के उपयोग की जरूरत जैसे ठोस नीतिगत समर्थन के कारण घरेलू सौर मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के लिये स्थिति अनुकूल बनी हुई है।

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