जरुरी जानकारी | तेल-तिलहनों के भाव में गिरावट का रुख, सोयाबीन डीगम पूर्वस्तर पर
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नयी दिल्ली, 11 जनवरी विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। वहीं ‘शॉर्ट सप्लाई’ के कारण सोयाबीन डीगम तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.75 प्रतिशत की गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 2.25 प्रतिशत टूटा था और फिलहाल इसमें आधा प्रतिशत का सुधार है।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा स्थिति तेल उद्योग के लिए काफी खराब है। आयातकों के बाद अब छोटी तेल मिलों की हालत खराब हो रही है। इनके पास किसान नीचे भाव में अपना माल ला ही नहीं रहे। हालांकि, मौजूदा बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक है पर किसानों को इससे पहले कहीं बेहतर कीमत मिलने के बाद वे उससे कम कीमत पर बेचने से कोताही कर रहे हैं। दूसरी ओर कोटा प्रणाली के तहत शुल्कमुक्त आयातित तेलों की कम कीमतों ने देशी तेल-तिलहनों पर इस कदर दबाव बना रखा है कि किसानों को सोयाबीन के बाद आगामी सरसों फसल खपाने की चिंता बढ़ती जा रही है। सबसे चिंताजनक बात तो यह है कि तेल उद्योग की इस बुरी हालत के बारे में न तो कोई तेल संगठन न ही मीडिया- कोई खोज खबर नहीं ले रहा है।
सूत्रों ने कहा कि ये सारे हालात देश को आत्मनिर्भरता हासिल करने के बजाय आयात पर पूर्ण निर्भर होने की ओर ले जाते दिख रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि खबर है कि इंडोनेशिया ने अपने तेल उद्योग को चलाने के लिए कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन के निर्यात शुल्क एवं लेवी के अंतर को पहले के 60 डॉलर से बढ़ाकर 68 डॉलर कर दिया है। यह बढ़ा हुआ शुल्क अंतर 16 जनवरी से लागू होगा। लेकिन देश के तेल-तिलहन उद्योग की खोज खबर नहीं ली जा रही है। इन तेल उद्योगों में भी बैंकों का पैसा लगा हुआ है जिसके डूबने का खतरा है।
आयातित तेलों के दाम आधे से भी ज्यादा कम हो गये हैं पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के कारण ग्राहकों को इस गिरावट का लाभ भी नहीं मिल रहा है। खासकर तेल संगठनों को इस स्थिति के बारे में सरकार को अपनी राय देनी चाहिये। सरकार को भी इस पर विचार करना चाहिये कि खल और दूध के दाम क्यों महंगे हो रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि कोटा प्रणाली के कारण कम आपूर्ति की वजह से सोयाबीन डीगम के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,685-6,735 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,675-6,735 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,780 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,490-2,755 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,030-2,160 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,090-2,215 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,800 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,600-5,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,345-5,365 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 11, 2023 06:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

