जरुरी जानकारी | सस्ते आयात के कारण देशी तेलों में गिरावट, आयातित तेल कीमतें भी टूटीं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सस्ते खाद्य तेलों का आयातित बढ़ने से घरेलू तेल तिहलनों पर बाजार में दबाव बरकार है। ऐसे वातावरण में शनिवार को दिल्ली तेल तिलहन बाजार में मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला जैसे देशी तेलों के भाव गिरावट दर्शाते बंद हुए। विदेशों में पर्याप्त स्टॉक होने और अगली पैदावार अच्छी होने की पूरी संभावना को देखते हुए, मांग होने के बावजूद पाम और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई।
नयी दिल्ली, आठ अगस्त सस्ते खाद्य तेलों का आयातित बढ़ने से घरेलू तेल तिहलनों पर बाजार में दबाव बरकार है। ऐसे वातावरण में शनिवार को दिल्ली तेल तिलहन बाजार में मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला जैसे देशी तेलों के भाव गिरावट दर्शाते बंद हुए। विदेशों में पर्याप्त स्टॉक होने और अगली पैदावार अच्छी होने की पूरी संभावना को देखते हुए, मांग होने के बावजूद पाम और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई।
बाजार सूत्रों ने कहा कि कुछ तेल आयातक बैंकों से पैसा लेकर भारी मात्रा में सोयाबीन डीगम का आयात कर रहे हैं और उन्हें कम दाम पर बाजार में खपा रहे हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में किसानों के पास सोयाबीन का पुराना स्टॉक भारी मात्रा में बचा हुआ है। आयातकों द्वारा इस भाव तोड़ने से सोयाबीन डीगम सहित सोयाबीन के अन्य बाकी किस्मों के तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई।
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बताया जा रहा है कि जुलाई में अर्जेंटिना से चाल लाख टन सोयाबीन डिगम का भारत के लिए लदान हुआ। अगस्त में भी इतनी ही मात्रा चढ़ने वाली है। जबकि देश में सितंबर में सोयाबीन की नयी फसल आ जाएगी। इससे पहले से नीचे पड़े मूंगफली , सोयाबीन और सूरजमुख के भावों में दबाव और बढने के आसार है।
सूत्रों ने कहा कि इस बार किसानों को सरसों फसल के लिए अच्छी कीमत मिली है तथा नाफेड और हाफेड जैसी सहकारी एजेंसियां बहुत समझदारी के साथ कम मात्रा में बिकवाली कर रही है क्योंकि सरसों की अगली फसल आने में लगभग आठ महीने हैं। इस बार सरसों किसानों के अनुकूल सरकारी रुख को देखते हुए सरसों के अगली फसल लगभग दोगुनी हो सकती है बशर्ते कि सरसों के साथ देशी तेलों में ‘ब्लेंडिंग’ को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाये। सूत्रों ने कहा कि ब्लेंडिंग के नाम पर तेल व्यापारी 10-15 प्रतिशत सरसों तेल में बाकी 70 रुपये किलो बिकने वाले पामतेल जैसे तेल को मिलाकर उसे सरसों के नाम पर ऊंची कीमत (लगभग 110 रुपये किलो) के भाव बेच देते हैं जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान है।
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किसानों द्वारा कम भाव पर बिकवाली नहीं करने और ‘लॉकडाऊन’ के दौरान इसकी घरेलू खपत बढ़ने के कारण सरसों दाना (तिलहन) सरसों दादरी, पक्की और कच्ची घानी तेल की कीमतें अपरिवर्तित रहीं।
देश में होटल, रेस्तरां और छोटे खान पान की दुकानों की मांग बढ़ने के बावजूद मलेशिया और इंडोनेशिया में सीपीओ एवं पामोलीन तेल का अत्यधिक स्टॉक जमा होने और इसकी अगली फसल पैदावार भी बम्पर होने की संभावना के कारण पाम और पामोलीन तेल कीमतें गिरावट दर्शाती बंद हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार को खाद्य तेलों का बेपरता कारोबार करने वाले व्यापारियों पर नियंत्रण लगाना चाहिये जो बैंकों में अपने कारोबारी रिण खाते को चलाते रहने के लिए बाजार में बेपरता बिकवाली कर धांधली मचाते हैं। इनकी वजह से बैंकों का पैसा डूबता है।
तेल-तिलहन के शनिवार को बंद भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)
सरसों तिलहन - 5,150- 5,200 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।
मूंगफली दाना - 4,600- 4,650 रुपये।
वनस्पति घी- 965 - 1,070 रुपये प्रति टिन।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 12,000 रुपये।
मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,800- 1,850 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,615 - 1,755 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,725 - 1,845 रुपये प्रति टिन।
तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपये।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,400 रुपये।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,120 रुपये।
सोयाबीन तेल डीगम- 8,250 रुपये।
सीपीओ एक्स-कांडला-7,350 से 7,400 रुपये।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,250 रुपये।
पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 8,850 रुपये।
पामोलीन कांडला- 8,100 रुपये (बिना जीएसटी के)।
सोयाबीन तिलहन डिलिवरी भाव 3,620- 3,645 लूज में 3,355--3,420 रुपये।
मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपये
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