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जरुरी जानकारी | बीते सप्ताह विदेशी तेलों में गिरावट, स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव सुधरे

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जरुरी जानकारी | बीते सप्ताह विदेशी तेलों में गिरावट, स्थानीय तेल-तिलहनों के भाव सुधरे

नयी दिल्ली, पांच जून विदेशों से आयात किये जाने वाले सोयाबीन डीगम, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों के महंगा होने के कारण देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह इन तेलों के भाव में नरमी रही। दूसरी ओर आयातित तेलों की कमी को अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध देशी तेल-तिलहनों से पूरा किये जाने के कारण सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में मजबूती आई।

बाजार सूत्रों ने बताया कि विदेशों में बाजार नहीं टूटे हैं और वहां खाद्य तेलों के भाव मजबूत बने हुए हैं। सीपीओ का आयात कर उसका प्रसंस्करण करना महंगा बैठता है। पामोलीन और सोयाबीन डीगम जैसे तेल के आयात में भी नुकसान है। एक तो इन तेलों के दाम महंगे हैं, दूसरा आयात के मुकाबले स्थानीय बाजार में इन तेलों के भाव नीचे चल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों तेलों के आयात में करीब पांच रुपये प्रति किग्रा. का नुकसान है और इसी वजह से सरसों, मूंगफली और बिनौला जैसे देशी तेलों की मांग बढ़ी है।

सूत्रों ने कहा कि आयातित तेलों के महंगा होने के कारण सरसों पर काफी दबाव है और हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में सरसों का रिफाइंड बनाकर आयातित तेलों की कमी को पूरा किया जा रहा है। इस सरसों रिफाइंड का इस्तेमाल अन्य तेलों में ‘ब्लेंडिंग’ (मिश्रण) के लिए भी किया जा रहा है। मंडियों में सरसों की आवक भी कम होने लगी है और यह घटकर लगभग साढ़े तीन लाख बोरी रह गई है, जो पिछले साल जून के आरंभ में लगभग 5-5.5 लाख बोरी थी। यह स्थिति सरसों के लिए अच्छी नहीं है और बरसात के मौसम में मांग बढ़ने के बाद सरसों की दिक्कत देखने को मिल सकती है। बरसात के दिनों में लगभग सभी खाद्य तेलों की मांग बढने लगती है, इस ओर सरकार को ध्यान देना होगा।

सरसों पर दबाव होने के बारे में सूत्रों ने कहा कि एक ओर तो सरसों में मिलावट बंद है, दूसरा मंडियों में अब आवक कम हो रही है, सरसों रिफाइंड तेल का इस्तेमाल ‘ब्लेंडिंग’ के लिए भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस बार सरसों की खपत लगभग तीन गुना अधिक है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को फुटकर विक्रेताओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की निगरानी के लिए एक जांच दल का गठन करना चाहिये ताकि विभिन्न स्थानों पर इनके एमआरपी की निगरानी रखते हुए उचित कार्रवाई की जा सके। इस जांच दल को यह भी देखना होगा कि शुल्कों में छूट का फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है या नहीं।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन किसान नीचे भाव में बिक्री करने से हिचक रहे हैं और सोयाबीन पेराई संयंत्र वालों को इसका तेल बनाने में लगभग पांच रुपये प्रति किलो का नुकसान है। लगभग साढ़े पांच लाख टन डीआयल्ड केक का आयात खोलने के बाद स्थानीय सोयाबीन संयंत्र वालों को नुकसान है, क्योंकि उनके डीओसी की बिक्री प्रभावित हुई है।

सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 25 रुपये सुधरकर 7,440-7,490 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों दादरी तेल 250 रुपये सुधरकर समीक्षाधीन सप्ताहांत में 15,100 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें भी क्रमश: 35-30 रुपये सुधरकर क्रमश: 2,370-2,450 रुपये और 2,410-2,515 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुईं।

सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन के डीआयल्ड केक की मांग प्रभावित होने से सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 50-50 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,750-6,850 रुपये और 6,450-6,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

गिरावट के आम रुख के अनुरूप समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन तेल कीमतें नुकसान के साथ बंद हुईं। सोयाबीन दिल्ली का थोक भाव 200 रुपये की हानि के साथ 16,200 रुपये, सोयाबीन इंदौर 50 रुपये की गिरावट के साथ 15,700 रुपये और सोयाबीन डीगम का भाव 90 रुपये की गिरावट के साथ 14,710 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मूंगफली तेल की निर्यात मांग के कारण पूर्व सप्ताहांत के बंद भाव के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल-तिलहन के भाव लाभ दर्शाते बंद हुए। मूंगफली दाना 55 रुपये सुधरकर 6,765-6,900 रुपये, मूंगफली तेल गुजरात 20 रुपये के सुधार 16,020 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव भी पांच रुपये सुधरकर 2,675-2,865 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी बाजारों में कीमत अधिक होने और उसी के अनुरूप मांग कमजोर होने की वजह से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव भी 100 रुपये टूटकर 14,400 रुपये क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 140 रुपये टूटकर 15,860 रुपये और पामोलीन कांडला का भाव 150 रुपये टूटकर 14,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल का भाव 50 रुपये मजबूत होकर 15,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

राजेश

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2022 11:38 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).