देश की खबरें | न्यायपालिका में चयन प्रक्रिया के दौरान नियम बदलने या न बदलने के प्रश्न पर फैसला सुरक्षित

नयी दिल्ली, 18 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने इस सवाल पर मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या न्यायपालिका में विभिन्न पदों पर नियुक्ति संबंधी नियमों को प्रभावी चयन प्रक्रिया के दौरान बदला जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा, न्यायमूर्ति पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की संविधान पीठ ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

शीर्ष अदालत ने विभिन्न याचिकाओं में उठाये गये इस मुद्दे की पड़ताल के लिए पिछले वर्ष 24 नवम्बर को एक संविधान पीठ के गठन पर सहमति जताई थी। इन याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया था कि क्या न्यायपालिका में विभिन्न पदों पर नियुक्ति संबंधी नियमों को प्रभावी चयन प्रक्रिया के दौरान बदला जा सकता है।

न्यायालय ने केरल में 2017 में अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों के चयन की शर्तों में केरल उच्च न्यायालय द्वारा किये गये परिवर्तन को गत 12 जुलाई की सुनवाई के दौरान ‘स्पष्टतया मनमाना’ करार दिया था।

संविधान पीठ ने हालांकि छह वर्ष पहले राज्य की उच्चतर न्यायपालिका सेवाओं के लिए चयनित उम्मीदवारों को ‘पद से हटाने’ से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इस तरह का कदम ‘जनहित’ के खिलाफ तथा उनके (चयनित न्यायिक अधिकारियों के) लिए ‘कठोर’ होगा।

संविधान पीठ ने केरल उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ की ओर से चयन प्रक्रिया में किये गये बदलाव की ओलाचना की थी।

शीर्ष अदालत केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों से संबंधित 17 याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी।

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