नयी दिल्ली, 11 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने मुरादाबाद की एक अदालत को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह 2008 के एक आपराधिक मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की अपील पर छह महीने के भीतर फैसला करे।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि जिला एवं सत्र अदालत दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला करते समय अपराध की तिथि पर मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को एक किशोर मान सकती है।
खान और उनके पिता के खिलाफ 2008 में मुरादाबाद के छजलेट पुलिस थाने में आईपीसी की धाराओं 341 (गलत तरीके से रोकना) और 353 (सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि पुलिस द्वारा जांच के लिए उनके वाहन को रोके जाने के बाद उन्होंने यातायात अवरूद्ध कर दिया था।
खान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 13 अप्रैल, 2023 के उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था और इसके कारण उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
मुरादाबाद की अदालत ने इस मामले में फरवरी 2023 में खान को दो साल जेल की सजा सुनाई थी।
खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को कहा कि उनके नाबालिग होने के दावे पर निचली अदालत से उनके पक्ष में रिपोर्ट आई है।
उन्होंने कहा कि खान अपील के लंबित रहने तक अपनी सजा को स्थगित करने का अनुरोध कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि सत्र न्यायालय पहले से ही इस मामले में अपील पर सुनवाई कर रहा है और वह अधिकतम यही कर सकता है कि वह न्यायालय से दोषसिद्धि के खिलाफ अपील का शीघ्र निपटारा करने के लिए कहे।
पीठ ने मुरादाबाद स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय को आदेश दिया कि वह अपील पर छह महीने के भीतर निर्णय करे।
सिब्बल ने कहा कि चूंकि उनके नाबालिग होने के दावे पर रिपोर्ट उपलब्ध है, इसलिए सत्र अदालत को अपील पर निर्णय करते समय इस पर विचार करने का निर्देश दिया जा सकता है।
पीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय से कहा कि वह अपराध की तिथि पर खान को किशोर के रूप में माने।
उच्चतम न्यायालय ने तीन मई, 2024 को खान के किशोर होने के दावे पर जिला न्यायाधीश, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट को ध्यान में रखा।
इसने 26 सितंबर, 2023 को मुरादाबाद जिला अदालत से उसके किशोर होने के दावे का पता लगाने और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के अनुसार निष्कर्ष निकालने को कहा।
उच्चतम न्यायालय ने एक मई, 2023 को आपराधिक मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ खान की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 13 फरवरी 2023 को आजम खान और उनके पुत्र को दो-दो वर्ष के कारावास तथा तीन-तीन हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई।
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