देश की खबरें | छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी

रायपुर, 21 जुलाई छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस हुई।

राज्य में इस वर्ष के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। यह मानसून सत्र इस सरकार का अंतिम सत्र है।

सदन में विपक्षी सदस्यों ने कथित भ्रष्टाचार और अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं करने को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। वहीं सत्ताधारी दल ने आरोपों को खारिज कर दावा किया कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने समाज के हर वर्ग का ख्याल रखा है और इस सरकार में छत्तीसगढ़ और राज्य संस्कृति का गौरव बढ़ा है।

सत्ताधारी दल के सदस्यों ने कहा कि विपक्ष कोई ठोस मुद्दा लाने में विफल रहा।

विधानसभा के चार दिवसीय मानसून सत्र के आखिरी दिन दोपहर 12 बजे के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू हुई जिसके तहत भाजपा ने 109 सूत्री आरोप पत्र पेश किया। भाजपा ने बुधवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और इस पर शुक्रवार को चर्चा शुरू हुई।

सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी है और देर रात तक इसके जारी रहने की संभावना है।

बहस की शुरुआत करते हुए, वरिष्ठ भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा और कहा कि अविश्वास प्रस्ताव इसलिए लाया गया है क्योंकि यह सरकार "बहरी और गूंगी" हो गई है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के खिलाफ बघेल सरकार द्वारा किए गए अत्याचार ब्रिटिश शासकों द्वारा किए गए अत्याचारों से कहीं अधिक हैं।

फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के युवकों द्वारा किए गए विरोध का जिक्र करते हुए अग्रवाल ने कहा कि इस सरकार में युवाओं को कपड़े उतारने पड़ते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ''कांग्रेस सरकार राज्य का विकास नहीं कर सकती... बल्कि वह आत्म कल्याण में लगी रहती है।''

सत्ताधारी दल कांग्रेस में संगठन और मंत्रिमंडल में हाल में हुए बदलावों पर कटाक्ष करते हुए अग्रवाल ने कहा, 'मुख्यमंत्री को न अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों पर भरोसा है और न ही अपने पार्टी प्रमुख पर। वहीं मंत्रियों को मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है।”

वह कांग्रेस नेता मोहन मरकाम को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को मंत्रिमंडल से हटाकर मरकाम को मंत्रिमंडल में शामिल करने का जिक्र कर रहे थे।

अग्रवाल ने कथित शराब घोटाले और अन्य भ्रष्टाचार को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री रवींद्र चौबे ने कहा कि वह पिछले 35 साल से सदन के सदस्य हैं लेकिन उन्होंने इतना खोखला अविश्वास प्रस्ताव कभी नहीं देखा। आरोप पत्र सिर्फ झूठ का पुलिंदा है।

अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए चौबे ने कहा, 'भूपेश है तो भरोसा है, बीजेपी है तो धोखा है।'

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने न केवल समाज के हर वर्ग के हित में काम किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भी प्रतिष्ठा दिलाई है।

उनकी बात काटते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ को 1,05,000 करोड़ दिए हैं।

इसके बाद, चौबे ने धान खरीद को लेकर इस महीने की शुरुआत में रायपुर में अपनी सार्वजनिक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा को किसानों और धान के बारे में बोलने का अधिकार नहीं है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए मंत्री ने कहा कि बृजमोहन अग्रवाल विरोध का जिक्र कर रहे थे । अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक विधानसभा के विशेष सत्र में पारित किए गए थे लेकिन राजभवन ने उन पर सहमति नहीं दी।

उन्होंने दावा किया कि राजभवन को राजनीति का अड्डा बना दिया गया है।

जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर प्रस्ताव के पक्ष में बोल रहे थे, तो विपक्ष और मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन में हंगामा शुरू हो गया।

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