देश की खबरें | खराब मौसम से मौत के मामले कम हुए, संपत्ति का नुकसान बढ़ रहा है : आईएमडी प्रमुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में बेहद खराब मौसम की घटनाओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संपत्ति का नुकसान बढ़ रहा है। केदारनाथ में 2013 में आई बाढ़ और इस साल हिमाचल प्रदेश की बाढ़ की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम जनता द्वारा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, भविष्यवाणी और तैयारियों, रोकथाम और शमन में जबरदस्त सुधार हुआ है।
नयी दिल्ली, 13 जुलाई भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में बेहद खराब मौसम की घटनाओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संपत्ति का नुकसान बढ़ रहा है। केदारनाथ में 2013 में आई बाढ़ और इस साल हिमाचल प्रदेश की बाढ़ की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम जनता द्वारा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, भविष्यवाणी और तैयारियों, रोकथाम और शमन में जबरदस्त सुधार हुआ है।
नीति शोध से जुड़ी विचारक संस्था ‘द सेंटर ऑर एनर्जी, एनवॉयरमेंट एंड वाटर’ (सीईईडब्ल्यू) की एक रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “हम पिछले कुछ वर्षों में मौतों की संख्या को कम करने में सक्षम रहे हैं, लेकिन संपत्ति का नुकसान बढ़ रहा है क्योंकि देश में सामाजिक-आर्थिक प्रगति बढ़ रही है।”
आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में देश में हर साल 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत के मामलों को रेखांकित करते हुए महापात्र ने कहा कि वज्रपात की घटनाएं चुनौती बन गयी हैं जबकि “हमने उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसी आपदाओं से मुकाबला किया है और उन पर लगभग विजय प्राप्त की है”।
उन्होंने कहा, “बिजली गिरना बहुत छोटे स्तर की घटना है और इसके घटित होने में कम समय लगता है। इसकी भविष्यवाणी भी मुश्किल है।”
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने मिलकर आकाशीय बिजली की भविष्यवाणी के लिए एक मॉडलिंग प्रणाली विकसित की है।
भारत दुनिया के उन मात्र पांच देशों में शामिल है जिनके पास बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी प्रणाली है।
उन्होंने कहा कि शहरी आबादी में वृद्धि के साथ, शहरी बाढ़ देश के लिए एक और चुनौती बन गई है।
सीईईडब्ल्यू रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अनुमानित 72 प्रतिशत जिले अत्यधिक बाढ़ की घटनाओं के प्रभाव में आ सकते हैं, लेकिन उनमें से केवल 25 प्रतिशत में ही बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र या पूर्व चेतावनी प्रणाली हैं।
बाढ़ के उच्च जोखिम के बावजूद, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं।
रिपोर्ट से पता चला है कि इस समय भारी बाढ़ से जूझ रहा हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की सबसे कम उपलब्धता वाले राज्यों में से एक है। दूसरी ओर, उत्तराखंड में गंभीर बाढ़ की घटनाएं सामान्य रूप से होती हैं, लेकिन यहां बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली की उच्च उपलब्धता है।
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