देश की खबरें | डीबीए ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री के आरोपों की निंदा की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली बार एसोसिएशन (डीबीए) ने उच्चतम न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश के खिलाफ आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के कथित आरोपों की निंदा की। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाए थे कि वह आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय की बैठकों को प्रभावित कर रहे हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर दिल्ली बार एसोसिएशन (डीबीए) ने उच्चतम न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश के खिलाफ आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के कथित आरोपों की निंदा की। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाए थे कि वह आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय की बैठकों को प्रभावित कर रहे हैं।

डीबीए की कार्यकारी समिति ने कहा कि रेड्डी ने छह अक्टूबर को भारत के प्रधान न्यायाधीश को ‘‘निराधार और गलत’’ पत्र प्रेषित किया था, जिसमें उच्चतम न्यायालय और आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। डीबीए राष्ट्रीय राजधानी में सभी जिला अदालतों का मूल बार है।

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एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में कहा, ‘‘यह सर्वसम्मति से कहा गया है कि जगन मोहन रेड्डी ने छह अक्टूबर 2020 को निराधार और गलत पत्र प्रेषित किया है जिसमें उच्चतम न्यायालय और आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और इसे न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने के लिए जारी किया गया है।’’

तीस हजारी जिला अदालत के दिल्ली बार एसोसिएशन ने कहा कि लंबे समय से यह परंपरा रही है कि कोई भी उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश पर बेवजह आक्षेप नहीं लगा सकता है और इस तरह के कृत्य अदालत की अवमानना माने जाते हैं।

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एसोसिएशन ने कहा, ‘‘छह अक्टूबर के पत्र से प्रतीत होता है कि न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप के गलत इरादे से इसे लिखा गया है।’’

उल्लेखनीय है कि रेड्डी ने भारत के प्रधान न्यायमूर्ति एसए बोबड़े को पत्र लिख कर आरोप लगाया कि आंधप्रदेश उच्च न्यायालय का इस्तेमाल ‘‘उनकी लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने और गिराने’’ के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने भारत के प्रधान न्यायाधीश से मामले पर ध्यान देने और ऐसे कदम उठाने का अनुरोध किया जो यह सुनिश्चित करें कि राज्य की न्यायपालिका की तटस्थता बनी रहे।

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