देश की खबरें | दरियागंज हिंसा : दिल्ली की अदालत ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य को जमानत दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने पिछले वर्ष दिसम्बर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुई हिंसा के सिलसिले में पिंजरा तोड़ समूह से जुड़ी हुई एक महिला को जमानत दे दी। पिंजरा तोड़ समूह दिल्ली भर के कॉलेजों की महिला छात्रों एवं पूर्व छात्रों का संगठन है।

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नयी दिल्ली, दो जून दिल्ली की एक अदालत ने पिछले वर्ष दिसम्बर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुई हिंसा के सिलसिले में पिंजरा तोड़ समूह से जुड़ी हुई एक महिला को जमानत दे दी। पिंजरा तोड़ समूह दिल्ली भर के कॉलेजों की महिला छात्रों एवं पूर्व छात्रों का संगठन है।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय ने जेएनयू की छात्रा देवांगना कलिता को 30 हजार रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर जमानत दी और उस पर ‘‘कड़ी’’ शर्तें लगाई हैं।

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अदालत ने उसे निर्देश दिया कि इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त नहीं हो और जांच एजेंसी के साथ सहयोग करे।

इसने कहा कि वह अगले आदेश तक संबंधित अदालत में अपना पासपोर्ट जमा कराए।

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कलिता को तीसरे मामले में रविवार को गिरफ्तार किया गया था और उसे तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को भी मामले में पिछले वर्ष दिसम्बर में गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें भी जमानत दे दी गई थी।

इससे पहले कलिता को उतरपूर्वी दिल्ली में फरवरी में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दिसम्बर में हुई हिंसा मामले की अभी तक हुई जांच में कलिता के सीधे इसमें संलिप्त होने के सबूत नहीं हैं।

इसने कहा कि सीसीटीवी फुटेज यह नहीं दिखाता कि वह किसी हिंसक गतिविधि में शामिल थी।

सुनवाई के दौरान उस समय नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला जब कलिता को अदालत में पेश किया गया लेकिन उसकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ और उसे 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का आदेश दिया गया।

बहरहाल, दस मिनट बाद कलिता के वकील अदित एस. पुजारी और तुषारिका मट्टू पेश हुए और उसकी जमानत की याचिका दायर की।

उन्होंने दावा किया कि जांच अधिकारी ने कलिता को पेश करने के समय के बारे में नहीं बताया और उनके फोन भी नहीं उठाए और इसलिए वे समय पर अदालत में पेश नहीं हो सके।

पिंजड़ा तोड़ की स्थापना 2015 में हुई थी जिसका उद्देश्य छात्रावासों एवं पेइंग गेस्ट हाउस में छात्राओं पर लगी पाबंदियों को कम करना था।

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