देश की खबरें | दिल्ली-एनसीआर में पसरी धुंध; वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंची
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार को धुंध की परत छाने के साथ ही पूरे क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता गिरकर 'बहुत खराब' की श्रेणी में पहुंच गई। हालांकि क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत क्षेत्र में बिजली जनरेटर पर प्रतिबंध सहित कई सख्त वायु प्रदूषण-रोधी उपायों को भी लागू किया गया है।

नासा के कृत्रिम उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीरों में पंजाब के अमृतसर, पटियाला, तरनतारन और फिरोजपुर तथा हरियाणा के अंबाला और राजपुरा में बड़े पैमाने पर खेतों में पराली जलाए जाने का पता चला है।

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हालांकि, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की 'वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली' ने कहा कि राजधानी की वायु गुणवत्ता पर इसका प्रभाव फिलहाल कम है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पराली जलाना दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण नहीं है।

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जावड़ेकर ने कहा, ‘‘केवल चार प्रतिशत प्रदूषण पराली जलाने के कारण है। इसके अलावा, 96 प्रतिशत प्रदूषण स्थानीय कारणों से है, जिसमें बायोमास जलाने, कचरा निस्तारण, कच्ची सड़कों, धूल, निर्माण और तोड़-फोड़ संबंधी गतिविधियां शामिल है। ’’

केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में सर्वाधिक प्रदूषित स्थलों पर नजर रखने के लिए बृहस्पतिवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 टीमें तैनात कीं और पंजाब सरकार से पराली जलाने पर रोक लगाने की अपील की।

महानगर में सुबह 11:10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 दर्ज किया। इस साल इससे पहले हवा की गुणवत्ता का इतना खराब स्तर फरवरी में था।

चौबीस घंटे का औसत एक्यूआई बुधवार को 276 था, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। यह मंगलवार को 300, सोमवार को 261, रविवार को 216 और शनिवार को 221 था।

बृहस्पतिवार सुबह प्रदूषण का सबसे अधिक स्तर आईटीओ (एक्यूआई 372), विवेक विहार (एक्यूआई 370) और शादीपुर (एक्यूआई 359) में दर्ज किया गया।

पड़ोसी शहरों फरीदाबाद (317), गाजियाबाद (326), ग्रेटर नोएडा (344) और नोएडा (314) में भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब रही।

शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि हवा की गुणवत्ता में गिरावट का कारण हवा की गति कम होना हो सकता है जिसकी वजह से हवा में प्रदूषक पदार्थ जमा होते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में पीएम10 का स्तर सुबह 9:30 बजे 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक बढ़ गया। यह इस मौसम का अब तक का उच्चतम स्तर है। भारत में पीएम10 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे सुरक्षित माना जाता है।

पीएम2.5 का स्तर 151 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। पीएम2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक सुरक्षित माना जाता है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जीआरएपी बृहस्पतिवार से लागू हो गया। इसके तहत दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में कई तरह के प्रदूषण विरोधी उपाय किए जाते हैं।

इसे पर्यावरण और वन मंत्रालय ने 2017 में उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के माध्यम से लागू करने के लिए अधिसूचित किया था।

हवा की गुणवत्ता खराब होने पर जीआरएपी के तहत किए जाने वाले उपायों में लोगों के यातायात के लिए बस और मेट्रो सेवाएं बढ़ाने, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाना शामिल है।

"आपातकालीन" स्थिति में किए जाने वाले उपायों में दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर रोक, निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध और सम-विषम योजना को लागू करना शामिल है।

दिल्ली सरकार ने बुधवार को जीआरएपी के तहत वायु प्रदूषण-रोधी उपायों को लागू करने के निर्देश जारी किए, जिसमें अस्पतालों और रेलवे जैसी आवश्यक सेवाओं को छोड़ कर बाकी जगहों पर बिजली जनरेटर पर प्रतिबंध लगाना शामिल है।

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने केंद्र सरकार से दिल्ली के 300 किलोमीटर के भीतर कोयले से चलने वाले 13 बिजली संयंत्रों को बंद करने का अनुरोध किया है, जो प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा करने के लिए मिली दो समय-सीमाएं चूक गए हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कहा है कि उसने 50 टीमें गठित की हैं, जो सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारकों व मानदंडों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखेंगी।

कृष्ण

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