मुंबई, 30 अक्टूबर परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) वित्तीय राजधानी मुंबई, इंदौर और चेन्नई के समीप कलपक्कम स्थित अपनी इकाइयों में पालना केंद्र (इनक्यूबेशन सेंटर) स्थापित करेगा। इस पहल का मकसद परमाणु प्रौद्योगिकी के आधार पर समाज के लिये परमाणु उत्पाद बनाने को लेकर उद्यमियों की मदद करना है। एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह कहा।
पालना केंद्र वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में मई 2020 में प्रस्तावित सुधारों के अनुरूप है। प्रस्तावित सुधारों के तहत सरकार ने परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की जररूत पर जोर दिया था।
अबतक परमाणु विज्ञान पर सरकारी संस्थानों का ही नियंत्रण रहा है। जिन सुधारों का प्रस्ताव किया गया, वह महामारी के दौरान घोषित सुधारों का हिस्सा है।
भारतीय परमाणु कार्यक्रम के संस्थापक होमी भाभा की जयंती के अवसर पर आयोजित सालाना कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के चेयरमैन के एन व्यास ने परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा पालना केंद्र स्थापित किये जाने की घोषणा की।
यह भी पढ़े | Gujarat by-polls 2020: गुजरात उपचुनाव लड़ने वाले 25 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति.
व्यास ने कहा, ‘‘शुरू में मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम स्थित आईजीसीएआर (इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र,) इंदौर में राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में पालना केंद्र स्थापित किये जाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि कोलकाता स्थित वैरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रोन सेंटर और डीएई के एक और केंद्र में इसी प्रकार की सुविधाओं के लिये काम जारी है।
व्यास ने कहा कि समाज की जरूरतों के अनुसार इकाइयां नई प्रौद्योगिकी के विकास के लिये संबंधित भागीदारों के साथ गठजोड़ कर सकती हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY