विदेश की खबरें | मंकीपॉक्स के वर्तमान लक्षण पिछले प्रकोपों ​​से अलग हैं: बीएमजे अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि वर्तमान में मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जो आम तौर पर विषाणु संक्रमण से जुड़े हुए नहीं हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लंदन, एक अगस्त ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि वर्तमान में मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जो आम तौर पर विषाणु संक्रमण से जुड़े हुए नहीं हैं।

यह निष्कर्ष मई और जुलाई 2022 के बीच लंदन स्थित एक संक्रामक रोग केंद्र में मंकीपॉक्स के 197 पुष्ट मामलों पर आधारित है।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि रोगियों द्वारा बताए गए कुछ सामान्य लक्षणों में मलाशय में दर्द और लिंग में सूजन शामिल हैं जो पिछले प्रकोपों ​​​​के लक्षणों से भिन्न हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षणों वाले रोगियों के मामले में चीजों की समीक्षा की जानी चाहिए।

अध्ययन में शामिल सभी 197 प्रतिभागी पुरुष थे जिनकी औसत आयु 38 वर्ष थी। इनमें से 196 की पहचान समलैंगिक, उभयलैंगिकता रखने वाले या ऐसे अन्य पुरुषों के रूप में हुई जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं।

अधिकतर (86 प्रतिशत) रोगियों ने प्रणालीगत बीमारी यानी पूरे शरीर के प्रभावित होने की सूचना दी। सबसे आम प्रणालीगत लक्षणों में बुखार (62 प्रतिशत), लिम्फ नोड्स में सूजन (58 प्रतिशत) और मांसपेशियों में दर्द (32 प्रतिशत) शामिल हैं।

अध्ययन में शामिल 71 रोगियों ने मलाशय में दर्द, 33 ने गले में खराश और 31 ने लिंग में सूजन की सूचना दी, जबकि 27 के मुंह में घाव थे, 22 को शरीर के विभिन्न हिस्सों पर एकल घाव तथा नौ रोगियों के टॉन्सिल में सूजन थी।

अनुसंधानकर्ताओं ने उल्लेख किया कि एकल घाव और टॉन्सिल में सूजन को पहले मंकीपॉक्स संक्रमण के विशिष्ट लक्षणों के रूप में नहीं जाना जाता था। उन्होंने कहा कि एक तिहाई (36 प्रतिशत) प्रतिभागियों को एचआईवी संक्रमण भी था और 32 प्रतिशत लोगों में यौन संचारित संक्रमण था।

कुल मिलाकर, 20 (10 प्रतिशत) प्रतिभागियों को लक्षणों के प्रबंधन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनमें ज्यादातर को मलाशय में दर्द और लिंग में सूजन की समस्या थी। हालांकि, किसी की मौत की सूचना नहीं मिली और किसी भी मरीज को गहन चिकित्सा कक्ष में रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

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