ताजा खबरें | सरकारी योजनाओं को लागू करने के लिए सीएसआर कोष का उपयोग नहीं किया गया: वित्त राज्यमंत्री
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सरकार ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधियों का उपयोग सरकार की केंद्रीय योजनाओं को लागू करने के लिए नहीं किया जाता है।
नयी दिल्ली, 16 मार्च सरकार ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधियों का उपयोग सरकार की केंद्रीय योजनाओं को लागू करने के लिए नहीं किया जाता है।
वित्त और निगमित मामलों के राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि कंपनी अधिनियम 2013 के अनुच्छेद सात में स्पष्ट कहा गया है कि कहां सभी सीएसआर फंड को खर्च किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि सरकारी योजनाओं को लागू करने के लिए इस धन स्रोत का उपयोग नहीं किया जाता है ... एक मिथक नहीं होना चाहिए कि सीएसआर धन का उपयोग सरकारी योजनाओं को लागू करने के लिए किया जाता है। सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की व्यवस्था करती है।’’
ठाकुर ने कहा कि सामाजिक जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में सीएसआर फंड का उपयोग स्थानीय क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है, जिसके लिए कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा संचालित एक नीति होती है।
उन्होंने कहा कि अब तक 60 प्रतिशत धनराशि कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा और 40 प्रतिशत कंपनियों द्वारा अपने विभिन्न निकायों के माध्यम से खर्च की जाती है।
इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 में कंपनी अधिनियम आने पर एजेंसियों और गैर सरकारी संगठनों के विवरण को लागू करने का कोई प्रावधान नहीं था।
उन्होंने कहा कि हालांकि, वर्तमान सरकार ने कानून में बदलाव किया और अमल करने वाली एजेंसियों को निगमित मामलों के मंत्रालय की रजिस्ट्री में खुद को पंजीकृत कराना अनिवार्य कर दिया, जिससे कार्यान्वयन एजेंसियों का विवरण प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
वंचित क्षेत्रों में विभिन्न मदों पर खर्च की गई धनराशि के बारे में जानने के लिए किसी तंत्र के होने के बारे में पूछे गये प्रश्न के जवाब में, मंत्री ने कहा कि अधिकांश धन को देश भर में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाता है।
टीडीपी नेता कनकमेदला रवींद्र कुमार ने पूछा कि क्या सरकार ने सीएसआर गतिविधियों की निगरानी और निरीक्षण के लिए एक अलग तंत्र स्थापित करने की योजना बनाई ह। इस पर मंत्री ने कहा कि 10 करोड़ से अधिक सीएसआर फंड खर्च करने वाली कंपनियों को एक निर्देश जारी किया गया है कि वे एक प्रभाव आकलन रिपोर्ट जमा करें।
कोविड -19 के मद्देनजर वित्तपोषण संकट का सामना कर रहे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को समर्थन देने की योजना के बारे में एक अन्य प्रश्न के जवाब में, मंत्री ने कहा कि सीएसआर खर्च कंपनी की बोर्ड-चालित नीति पर आधारित होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी का बोर्ड तय करता है कि कहां और कितना खर्च करना है।’’
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