देश की खबरें | सीएसई ने शहरों को कचरा मुक्त बनाने के लिये कार्ययोजना जारी की

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नयी दिल्ली, 15 सितंबर भारत के कचरा-मुक्त शहरों के एजेंडे के समर्थन के तहत सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने बृहस्पतिवार को कचरा प्रबंधन के लिए एक रोडमैप जारी किया।

सीएसई के सात-बिंदु वाले रोडमैप में एक स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना विकसित करना, कचरे के अंशों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और एक व्यापक नीति तथा प्रोटोकॉल के आधार पर पुनः प्राप्त भूमि का स्थायी रूप से फिर से उपयोग करना शामिल है।

योजना में कचरे के प्राप्त अंशों के लाभकारी उपयोग के लिए विकासशील मानक, प्राप्त सामग्री के प्रबंधन को प्रोत्साहित करना, शहरी विभागों का क्षमता निर्माण और स्वास्थ्य के लिहाज से उचित लैंडफिल के स्थायी संचालन को सुनिश्चित करना शामिल है।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, “स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) 2.0 के मद्देनजर ‘विरासत अपशिष्ट’ शब्द पर करीब से ध्यान दिया गया है और यह अनिवार्य है कि भारत के शहरों को विरासत अपशिष्ट स्थलों (पहले से बने लैंडफिल) को साफ करना चाहिए, भूमि को पुनः प्राप्त करना चाहिए और अधिक कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “देश में 3000 कचरे के मैदानों में 130 करोड़ टन कचरा पहले से मौजूद (विरासती) है, यह एक कठिन लेकिन किया जा सकने वाला काम है।”

सीएसई द्वारा ‘लेगेसी वेस्ट मैनेजमेंट और डंपसाइट रेमेडिएशन’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव रूपा मिश्रा ने कहा कि मंत्रालय ने भारतीय शहरों को कचरा मुक्त बनाने के लिए शहर प्रशासन को प्रोत्साहित करने के वास्ते कई परियोजनाएं और योजनाएं शुरू की हैं।

मिश्रा ने कहा, “केंद्र सरकार का हर कार्यक्रम और नीति का प्रमुख लक्ष्य है- भारतीय शहरों को कचरा मुक्त बनाना। हमनें नगर प्रशासन को प्रोत्साहित करने के लिए कई परियोजनाएं और योजनाएं भी शुरू की हैं।”

सीएसई के ठोस कचरा प्रबंधन इकाई के कार्यक्रम निदेशक अतिन बिश्वास ने कहा, “यद्यपि ‘विरासत अपशिष्ट’ शब्द को भारत में किसी भी आधिकारिक सरकारी दस्तावेज में परिभाषित नहीं किया गया है, यह आम तौर पर लैंडफिल या कचरे के मैदानों में पुराने ठोस कचरे को संदर्भित करता है।”

सीएसई के आकलन के मुताबिक भारत में लैंडफिल के पुनर्शोधन पर 1,04,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

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