देश की खबरें | भाकपा सांसद ने प्रश्नकाल स्थगित करने को बताया ‘अनुचित’, बहाल करने की नायडू से की मांग

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाकपा सांसद बिनय विश्वम ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर कहा है कि प्रश्नकाल और गैर-सरकारी कामकाज स्थगित किया जाना ‘अनुचित’ है और उन्हें तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो सितंबर भाकपा सांसद बिनय विश्वम ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर कहा है कि प्रश्नकाल और गैर-सरकारी कामकाज स्थगित किया जाना ‘अनुचित’ है और उन्हें तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।

विश्वम ने कहा कि ऐसे समय, जब देश में कई घटनाक्रम हो रहे है, इन संसदीय प्रक्रियाओं को निलंबित करने से सरकार के "इरादे पर "गंभीर सवाल" उठता है।

यह भी पढ़े | दिल्ली में सिर्फ एक लाइन पर ही शुरू होगी मेट्रो सेवा, सुबह 7 से 11 बजे तक और शाम 4 से 8 बजे तक सेवा होगी उपलब्ध : 2 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

उन्होंने कहा, "इन बदलावों की शुरूआत कर सरकार ने प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित किया है कि संसद और लोगों के प्रति उसकी जवाबदेही समाप्त हो जाए।’’

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण संसद का सत्र मार्च में बीच में ही अचानक समाप्त कर दिया गया था।

यह भी पढ़े | NEET, JEE Final Year Exams 2020: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने परीक्षाओं को लेकर जारी किया हेल्थ एडवाइजरी, यहां देखें पूरी लिस्ट.

भाकपा सांसद ने एक बयान में कहा कि उस समय से संसद का सत्र स्थगित है जबकि देश भर में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल एक अभिन्न साधन है जो प्रतिनिधियों को सरकार से विशिष्ट सवाल पूछने का मौका देता है। वहीं गैर-सरकारी कामकाज के तहत सदस्यों को राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर ऐसे विधेयक और संकल्प पेश करने का मौका देता है जिन्हें सरकार नहीं ला सकती।

उन्होंने कहा कि देश ने एक अभूतपूर्व मानवीय संकट देखा जिसमें लाखों श्रमिकों को जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

विश्वम ने कहा कि लॉकडाउन के पहले से ही विकट स्थिति का सामना कर रही अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुयी है और सरकार के प्रोत्साहन पैकेज से इसमें जान आने की कम ही उम्मीद है। इसके अलावा कोविड-19 वायरस पूरे देश में तेजी से फैल गया है क्योंकि भारत में करीब 37 लाख मामले सामने आ चुके हैं और 65,000 से अधिक मरीजों की मौतें हुई हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\