देश की खबरें | पैजी मामले में सीबीआई की जांच रोकने से अदालत का इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के उन दो पूर्व पुलिस अधिकारियों की एक अर्जी खारिज कर दी है जिन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को तिरुपुर में पैजी फॉरेक्स ट्रेडिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले की जांच करने से रोकने का अनुरोध किया था। अर्जी दायर करने वाले पूर्व पुलिस अधिकारियों में एक तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक भी शामिल हैं।

चेन्नई, तीन नवंबर मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के उन दो पूर्व पुलिस अधिकारियों की एक अर्जी खारिज कर दी है जिन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को तिरुपुर में पैजी फॉरेक्स ट्रेडिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले की जांच करने से रोकने का अनुरोध किया था। अर्जी दायर करने वाले पूर्व पुलिस अधिकारियों में एक तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक भी शामिल हैं।

दो अधिकारियों - प्रमोद कुमार, आईपीएस, तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक, पश्चिम जोन, कोयंबटूर और वी मोहन राज, पूर्व पुलिस निरीक्षक, सीसीबी, तिरुपुर के खिलाफ आरोप यह था कि उन्होंने मामले में मुख्य आरोपियों एवं पैजी के निदेशकों के मोहन राज, के कतिरावन और ए कमालावल्ली को बचाने के लिए कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

कंपनी ने जमाकर्ताओं से भारी ब्याज के साथ वापसी का झूठा वादा करके लगभग 100 करोड़ रुपये कथित तौर पर एकत्र किए थे और उन्हें धोखा दिया था।

मामले में प्राथमिकी 2011 में दर्ज की गई थी। जब दो पुलिस अधिकारियों द्वारा याचिका दायर की गई थी, तब चेन्नई में सीबीआई, आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच की जा रही थी।

न्यायमूर्ति सी वी कार्तिकेयन ने याचिकाकर्ताओं की दलील खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि सीबीआई पर पूर्वाग्रह का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उसने उन्हें ऐसे ही हवा से उठाकर आरोपी नहीं बनाया।

न्यायाधीश ने कहा कि वेल्लोर में सीबीसीआईडी ​​(राज्य पुलिस की अपराध शाखा) ने शुरुआत में जांच की थी और उनके खिलाफ सामग्री एकत्र की थी। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उन्हें समेकित किया और आगे की सामग्री एकत्र की और अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। न्यायाधीश ने कहा कि अगर सीबीआई ने जांच नहीं की होती, तो वेल्लोर सीबीसीआईडी ​​ने भी यही निष्कर्ष निकाला होता।

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