देश की खबरें | न्यायालय करेगा विचार : क्या अदालत जमानत की शर्तो में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है
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नयी दिल्ली, 10 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शु्क्रवार को कहा कि अदालत द्वारा किसी व्यक्ति को जमानत देते हुये लगायी गयी शर्तों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर वह विचार करेगा।
जमानत की शर्तों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा शीर्ष अदालत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 20 मई के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इस मामले में अदालत ने कथित देशद्रोह के मामले में आरोपी को जमानत देते हुये यह शर्त लगायी थी कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेगा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा। पीठ इस मुद्दे पर विचार करने के लिये सहमत हो गयी और उसने इस अपील पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा।
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि अगर सोशल मीडिया पर भागीदारी कर व्यक्ति कोई शरारत करता है तो अदालत ऐसा कह सकती है कि उसे इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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इस पर अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सोशल मीडिया से संबंधित कोई आरोप नहीं था।
इस अपील में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या अपीलकर्ता को सोशल मीडिया के इस्तेमाल से रोकना संविधान में प्रदत्त उसके अधिकारों से वंचित करना है।
उच्च न्यायालय ने 20 मई को आरोपी को जमानत पर रिहा करते हुये अपने आदेश में यह शर्त लगायी थी कि इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेगा। हालांकि, अदालत ने बाद में एक जून को अपने आदेश में संशोधन कर, सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने की अवधि 18 महीने या फिर मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक, इनमें से जो भी पहले हो, सीमित कर दिया था।
अनूप
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