देश की खबरें | न्यायालय ने केन्द्र से कहा: रोगाणुनाशक द्वार का इस्तेमाल नियंत्रित करने को लेकर निर्देश जारी करे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केन्द्र से कहा कि वह कोविड-19 के प्रबंधन के लिये मनुष्यों पर रोगाणुनाशक छिड़काव और अल्ट्रा वायलट किरणों का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने के बारे में एक महीने के भीतर निर्देश जारी करे।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केन्द्र से कहा कि वह कोविड-19 के प्रबंधन के लिये मनुष्यों पर रोगाणुनाशक छिड़काव और अल्ट्रा वायलट किरणों का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने के बारे में एक महीने के भीतर निर्देश जारी करे।

न्यायालय ने रोगाणुओं से मुक्त करने के लिये बनाये जा रहे द्वार के प्रयोग, लोगों पर रासायनिक छिड़काव एवं उसके उत्पादन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के लिये गुरसिमरन सिंह नरूला की जनहित याचिका पर सरकार को यह निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि लोगों पर कृत्रिम परागामी किरणें डालना प्रतिबंधित करने के बारे में भी इसी तरह के निर्देश जारी किये जायें।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि सरकार ने इस पर परामर्श जारी किया था जिसमे कहा गया था कि कोविड-19 के रोगाणुओं से मुक्त करने के लिए मनुष्य पर परागामी किरणों के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है लेकिन इसके बाद इसकी रोकथाम के लिये आगे कोई कदम नहीं उठाये गये थे।

पीठ ने कहा कि जनता के स्वास्थ को ध्यान में रखते हुये जरूरी है कि यह कवायद एक महीने के भीतर पूरी की जाये।

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पीठ ने अपने 37 पेज के फैसले में कहा, ‘‘हमारा विचार है कि मानव शरीर पर रोगाणुनाशक रसायन का छिड़काव या धुआं छोड़ना या परागामी किरणों के प्रयोग को नियंत्रित करने की जरूरत है जब केन्द्र का स्वंय का मानना है कि इसके उपयोग की सलाह नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि केन्द्र आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के तहत प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके रोगाणुनाशक द्वार से छिड़काव या रासायनिक धुआं छोड़ने को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने के लिये आवश्यक निर्देश जारी करने पर विचार कर सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर मानव शरीर पर रोगाणुनाशकों का उपयोग प्रतिकूल असर डालता है तो इसके लिये तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई की जरूरत है और प्राधिकारी यह कह कर इतिश्री नहीं मान सकते कि इसके उपयोग की सलाह नहीं दी जाती है।

न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सात सितंबर को केन्द्र से सवाल किया था कि कोविड-19 के दौरान रोगाणुओं से मुक्त करने वाले रसायन का लोगों पर छिड़काव हानिकारक होने के बावजूद उसने अभी तक रोगाणुओं से मुक्त करने वाले द्वार के प्रयोग पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया है।

केन्द्र ने नौ जून को न्यायालय को बताया था कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की बैठक में रोगाणुओं से मुक्ति के लिये रसायन का छिड़काव करने वाले द्वार बनाना और उनका छिड़काव करना या उनके धुएं से मनुष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की गयी थी।

केन्द्र ने कहा था कि विशेषज्ञ समिति ने इस बात को दोहराया है कि इस तरह के द्वार, चौखट या चैंबर्स के माध्यम से लोगों पर रसायन का छिड़काव उपयोगी नहीं है और यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या संक्रमण की छोटी छोटी बूंदे इसके प्रसार की क्षमता कम नहीं करता है।

अनूप

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