नयी दिल्ली, 13 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के 17 असफल अभ्यर्थियों की उस याचिका का परीक्षण करने के लिए बुधवार को तैयार हो गया है जिसमें इस साल के शुरू में हुई प्रारंभिक लोक सेवा परीक्षा की उत्तर कुंजी जारी करने का आग्रह किया गया है।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने यूपीएससी की इस दलील को खारिज कर दिया कि याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है और कहा कि यह मामला उम्मीदवारों के कानूनी और मौलिक अधिकारों के निर्णय से जुड़ा है जिसमें सभी पक्षों से समानता का व्यवहार, कानूनी अपेक्षा और जानने का अधिकार शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा में अर्हक (क्वालिफाइंग) अंक हासिल करने में नाकाम रहने वाले याचिकाकर्ताओं ने यूपीएससी द्वारा जून में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति को आधार बनाया है जिसमें कहा गया है कि अंतिम परिणाम का ऐलान किए जाने के बाद ही उत्तर कुंजी घोषित की जाएगी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “ याचिकाकर्ताओं के दावे प्रथम दृष्टया समान व्यवहार और जानने के अधिकार के साथ-साथ अभ्यर्थियों के मौलिक अधिकारों के पहलुओं से संबंधित लगते हैं और ऐसे में इस अदालत को प्रशासनिक कानून और संवैधानिक प्रावधानों के क्षेत्र में जाकर इसका परीक्षण करने की जरूरत है।”
अदालत ने कहा, “ जहां मौलिक अधिकारों या एक व्यक्ति के किसी अधिकारों को लागू करने और संरक्षित करने का आग्रह किया जाता है तो यह अदालत उससे अपना मुंह नहीं फेर सकती है... लिहाज़ा याचिका स्वीकार की जाती है। गुण दोष पर दलीलों के लिए इसे 26 सितंबर 2023 को सूचीबद्ध किया जाए।”
यूपीएससी ने कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि केवल केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के पास आयोग द्वारा भर्ती से संबंधित मुद्दों से निपटने की शक्ति है।
अदालत ने पिछले महीने इस पहलू पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कहा कि यूपीएससी को उत्तर कुंजी जारी करने का निर्देश दिया जा सकता है या नहीं, यह लोक सेवकों के ‘भर्ती’ के दायरे नहीं आता है जहां केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का अधिकार क्षेत्र लागू हो।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि केवल उत्तर कुंजी मांगना भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं है,क्योंकि इसका इस्तेमाल अभ्यर्थी अपना प्रदर्शन आंकने के लिए कर सकता है।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा मामले में अपनी न असफलता को और न ही परीक्षा की प्रक्रिया को चुनौती दी है। अदालत ने कहा कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया संपूर्ण होने से पहले सिर्फ उत्तर कुंजी को जारी करने का आग्रह किया है।
आदेश में कहा गया है, “ इस अदालत का मानना है कि इस याचिका पर निर्णय करने में कोई अड़चन नहीं है।”
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी थी कि प्रारंभिक लोक सेवा परीक्षा की उत्तर कुंजी का समय पर प्रकाशन जन हित में है, क्योंकि यह उन्हें अपनी क्षमताओं का आकलन करने और व्यवस्था से बोझ कम करने में मदद कर सकता है।
उन्होंने शुरू में अपनी याचिका में लोक सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2023 को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन बाद में केवल उत्तर कुंजी के प्रकाशन की अपनी मांग पर जोर देने का फैसला किया।
यूपीएससी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि "परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता" की रक्षा की जानी चाहिए क्योंकि लोक सेवा परीक्षाएं समयबद्ध तरीके से आयोजित की जानी चाहिए।
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