नयी दिल्ली, 27 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के खिलाफ दिसंबर 2020 में एक संवाददाता सम्मेलन में उनके कथित मानहानि वाले बयानों के लिए चेन्नई स्थित मुरासोली ट्रस्ट द्वारा दायर शिकायत पर आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी।
मद्रास उच्च न्यायालय ने पांच सितंबर के आदेश में कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली मुरुगन की याचिका न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मुरुगन के खिलाफ चेन्नई की एक विशेष अदालत में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी।
पीठ ने उनकी याचिका पर मुरासोली ट्रस्ट से भी जवाब मांगा।
मुरुगन के वकील ने पीठ से कहा कि मानहानि की कार्यवाही शुरू करना “पूरी तरह से अवैध” था और शिकायत राजनीतिक उद्देश्यों से दायर की गई थी।
मुरुगन ने अपने खिलाफ कार्यवाही को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ट्रस्ट के अनुसार, मुरुगन ने “आम जनता की नजर में मुरासोली ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को खराब करने और धूमिल करने के एक परोक्ष उद्देश्य से” बयान दिया था।
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