कोच्चि, 27 फरवरी केरल उच्च न्यायालय ने वर्ष 2012 के सनसनीखेज टीपी चंद्रशेखरन हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सभी आरोपियों को मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने कहा कि सभी नौ दोषी तब तक किसी भी तरह की छूट के पात्र नहीं होंगे जब तक कि वे 20 साल जेल में नहीं काट लेते।
अधीनस्थ न्यायालय द्वारा हत्या के मामले में सभी आरोपियों को दोषी ठहराये जाने के बाद 19 फरवरी को उच्च न्यायालय ने सभी आरोपियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।
उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले की पुष्टि करते हुए आरोपी अनूप, मनोज उर्फ किरमानी मनोज, एन के सुनील कुमार उर्फ कोडी सुनी, टी के राजेश, के के मुहम्मद शफी, एस सिजिथ, के शिनोज, के सी रामचंद्रन, मनोजन और कुन्हानंदन की दोषीसिद्धि को बरकरार रखा था।
अपीलों के लंबित रहने के दौरान आरोपी कुन्हानंदन की मौत हो गई थी।
उच्च न्यायालय ने चार मई, 2012 को ओंचियाम में रिवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी (आरएमपी) के नेता चंद्रशेखरन की हत्या से संबंधित मामले में दो अन्य आरोपियों को बरी करने के फैसले को भी रद्द करते हुए उन्हें आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया।
उच्च न्यायालय, दोषियों द्वारा दाखिल दोषसिद्धि और सजा को रद्द करने की मांग वाली कई अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील पर भी सुनवाई की।
चंद्रशेखरन की विधवा के.के. रीमा ने एक और अपील दायर की थी, जिसमें बरी किए गए आरोपियों को दोषी ठहराने की मांग की गई थी।
हालांकि सजा के विवरण वाला फैसला फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया गया है। कोझिकोड के अधीनस्थ न्यायालय ने इस मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जिला सचिव पी मोहनन सहित 24 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोझिकोड अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 2014 में 11 आरोपियों को आजीवन कारावास और एक अन्य आरोपी लंबू प्रदीप को तीन वर्ष जेल की सजा सुनाई थी।
दोषियों में माकपा के स्थानीय नेता के.सी. रामचंद्रन और कुन्हानंदन का नाम शामिल है।
घटना उस वक्त हुई थी, जब अपनी बाइक से घर लौट रहे चंद्रशेखरन (52) पर एक समूह ने हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।
केरल के तत्कालीन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था।
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