नयी दिल्ली, 23 नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व विशेष मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट को रिश्वत लेने के जुर्म में पांच साल कैद की सजा सुनाई है और कहा कि उसे पर्याप्त सजा नहीं दी गई तो लोगों का न्याय देने वाली व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाएगा।
दोषी आर पी भाटिया (70) अपराध के समय 2015 में मध्य जोन में विशेष मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (कचरा) के तौर पर काम करता था।
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सीबीआई ने 18 अगस्त 2015 को एक दुकान मालिक की शिकायत पर जाल बिछाया और भाटिया को रिश्वत लेते पकड़ लिया और 25,000 रुपये उसके बैग से बरामद कर लिए जो अदालत कक्ष से सटे उसके चैम्बर में रखा था।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश संतोष स्नेही ने कहा, “अपराध के समय दोषी अदालत कक्ष के डेस्क पर बैठ कर न्यायिक कामकाज कर रहा था। वह अपराध के समय 65 साल का था।“
उन्होंने कहा कि अगर दोषी को पर्याप्त सजा नहीं दी गई तो लोगों का न्याय देने वाली व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाएगा।
न्यायाधीश ने कहा कि दोषी परिपक्व व्यक्ति है और भारत के योजना आयोग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में सेवा दे चुका है और उससे उम्मीद थी कि वह उच्च नैतिक आचरण करेगा।
अदालत ने 19 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा कि सजा देने में किसी तरह की नरमी गलत सहानुभूति होगी और आम आदमी की नजरों में कानून के शासन को कमतर करेगी।
सीबीआई के मुताबिक, दोषी ने 10 अगस्त 2015 को निरीक्षण के दौरान दक्षिण दिल्ली के अलकनंदा बाजार में शिकायतकर्ता दुकान मालिक का चालान किया था और उससे लाजपत नगर स्थित अपनी अदालत में पेश होने को कहा था।
जब शिकायतकर्ता अदालत पहुंचा तो मजिस्ट्रेट ने मामले को निपटाने के लिए 60,000 रुपये की मांग की। मोल भाव के बाद मामला 25000 रुपये पर तय हो गया।
भाटिया ने दावा किया कि वह बेगुनाह है और दुकानदार ने उसे फंसाया है।
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