देश की खबरें | न्यायालय ने ‘विराट’ के विखंडन की स्थिति रिपोर्ट पर निजी कंपनी से मांगा जवाब
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय नौसेना के सेवामुक्त कर दिए गए विमान वाहक युद्धपोत ‘विराट’ को संरक्षित करने और उसे संग्रहालय में तब्दील करने का अनुरोध करने वाली एक निजी कंपनी से उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह युद्धपोत के विखंडन की स्थिति रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करे।
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल भारतीय नौसेना के सेवामुक्त कर दिए गए विमान वाहक युद्धपोत ‘विराट’ को संरक्षित करने और उसे संग्रहालय में तब्दील करने का अनुरोध करने वाली एक निजी कंपनी से उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह युद्धपोत के विखंडन की स्थिति रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करे।
आईएनएस विराट 29 वर्षों तक नौसेना में सेवा में रहा और इस युद्धपोत को मार्च 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। यह पिछले साल सितंबर में मुंबई से अलंग शिपयार्ड पहुंचा था जहां इसके विखंडन की प्रक्रिया जारी थी।
गुजरात के भावनगर जिले में एक अन्य निजी कंपनी श्री राम समूह ने विराट को पिछले साल जुलाई में हुई नीलामी में 38.54 करोड़ रुपये में खरीदा था और दिसंबर में विखंडन प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना तथा न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अप्रैल की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने विराट की विखंडन प्रकिया की स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद निजी कंपनी एनवीटेक मरीन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड से जानना चाहा कि एक कंपनी द्वारा युद्धपोत को वैध तरीके से खरीदने के बाद उसका विखंडन किया जा रहा है, ऐसे में वह (एनवीटेक) पोत को संग्रहालय बनाने के लिए क्यों लेना चाहती है।
एनवीटेक मरीन की ओर से याचिकाकर्ता रूपाली शर्मा ने कहा कि वह विखंडन की स्थिति जानने के लिए पोत का निरीक्षण करना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि “इस प्रकार के युद्धपोत दुनियाभर में संरक्षित किये जाते हैं।”
पीठ ने शर्मा से कहा, “युद्धपोत के लिए हमारी भावनाएं भी आपके जैसी हैं लेकिन अब वह एक निजी संपत्ति बन चुका है और अब उसमें युद्धपोत की विशेषताएं नहीं रही।”
पीठ ने कहा, “हम आपको (शर्मा) एक सप्ताह का समय देते हैं। आप रिपोर्ट पढ़िए और जवाब दाखिल कीजिए।” सुनवाई के दौरान, श्री राम समूह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने शर्मा की याचिका का विरोध किया।
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