जरुरी जानकारी | न्यायालय ने घने वनक्षेत्र स्थित कोयला ब्लॉक की नीलामी के फैसले पर केंद्र, राज्यों से मांगा जवाब

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नयी दिल्ली, 14 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को घने वन क्षेत्रों में वाणिज्यिक खनन के लिये कोयला ब्लॉक के आबंटन/नीलामी के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और सात राज्यों से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायाधीश ए एस बोपन्ना और न्यायाधीश वी रामासुब्रमणियम ने नोटिस जारी किया और खनन से जुड़े अन्य लंबित मामलों से याचिका को संबद्ध किया।

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सामाजिक कार्यकर्ता सुदीप श्रीवास्तव की तरफ से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह गंभीर मामला है क्योंकि सरकार ने स्वयं उन क्षेत्रों को निषेध क्षेत्र घोषित कर रखा है।

पीठ ने कहा, ‘‘...हम इस मामले में नोटिस जारी कर रहे हैं लेकिन हम इस मामले को अन्य लंबित खनन प्रकरणों के साथ लेंगे।

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शीर्ष अदालत ने जिन सात राज्यों से जवाब मांगा है, वे छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना हैं।

याचिका में कहा गया है कि रिट याचिका व्यापक जनहित में संविधान के अनुच्छेछ 32 के तहत केंद्र सरकार के नीलामी और आबंटन के माध्यम से घने वन क्षेत्रों में विभिन्न कोयला ब्लॉक के आबंटन के फैसले के खिलाफ दाखिल की गयी है।

इसमें कहा गया है कि यह सतत विकास के सिद्धांत के खिलाफ है क्योंकि केवल 15 प्रतिशत कोयला ही घने वन क्षेत्र के भीतर स्थित है जबकि शेष 85 प्रतिशत कोयला आने वाले 50 से 70 साल के लिये ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम है।

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